मृत्यु के बाद भी समाज के काम आएगा शरीर, शिक्षक राजेश कुमार यादव ने लिया देहदान का संकल्प
भावी चिकित्सकों की पढ़ाई और चिकित्सा अनुसंधान में योगदान देने की पहल, दूसरों को भी देहदान के लिए किया प्रेरित
धमतरी, 29 अक्टूबर (हि.स.)। जीवन रहते हुए समाज की सेवा करना तो अनेक लोग अपना कर्तव्य मानते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद भी दूसरों के काम आने का संकल्प विरले ही लेते हैं। इसी सेवा भावना की मिसाल पेश करते हुए शासकीय प्राथमिक शाला कोडेगांव (माल) में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत राजेश कुमार यादव ने देहदान करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में देहदान के लिए पंजीयन फॉर्म भरकर अपनी इच्छा व्यक्त की। उनकी इस पहल का शुभचिंतकों ने स्वागत करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया है।
राजेश कुमार यादव वर्ष 2002 से शासकीय प्राथमिक शाला कोडेगांव (माल), संकुल केंद्र कोडेगांव (रैय्यत) में प्रधान पाठक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। ग्राम पंचायत तूएगहन, तहसील चारामा निवासी यादव का मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर को सामान्यतः जला दिया जाता है या दफना दिया जाता है, जबकि देहदान के माध्यम से उसी शरीर का उपयोग चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए किया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपना शरीर भावी चिकित्सकों की पढ़ाई में योगदान के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया है।
चिकित्सा शिक्षा में देहदान का विशेष महत्व है। मानव शरीर की संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने में इससे भावी चिकित्सकों को सहायता मिलती है। साथ ही, चिकित्सा क्षेत्र में शैक्षणिक अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलता है। राजेश कुमार यादव की यह पहल संदेश देती है कि मृत्यु के बाद भी मानव शरीर किसी के ज्ञान, शिक्षा और बेहतर उपचार की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।
शालेय शिक्षक संघ के जिला सचिव राजेश कुमार यादव ने गुरुवार काे बताया कि उन्हें देहदान की प्रेरणा साहू समाज के युवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू और सेवानिवृत्त प्राचार्य एलआर तिवारी से मिली। उनके सेवा भाव और नेक विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने भी समाज के कल्याण के लिए कुछ अलग करने का निर्णय लिया।
यादव का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनने और जनकल्याण की भावना के साथ कार्य करने का प्रयास करना चाहिए। उनका मानना है कि सेवा केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यदि मृत्यु के बाद भी हमारा शरीर किसी के ज्ञान और भविष्य निर्माण में सहायक बन सके, तो इससे बड़ा योगदान क्या हो सकता है।
देहदान अपनी इच्छा से किया जाने वाला महत्वपूर्ण निर्णय है। इसके माध्यम से चिकित्सा शिक्षा, शैक्षणिक अनुसंधान और मानव शरीर की संरचना के अध्ययन में योगदान दिया जा सकता है। इसके लिए संबंधित मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन कराना आवश्यक होता है।
देहदान का संकल्प लेने वाले व्यक्ति को अपने निकटस्थ परिजनों, मित्रों, पड़ोसियों और पारिवारिक चिकित्सक को इसकी जानकारी देनी चाहिए, ताकि मृत्यु के बाद आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके। देहदान से संबंधित दस्तावेज और संपर्क विवरण सुरक्षित रखना भी उपयोगी होता है। हालांकि, देह स्वीकार करने की प्रक्रिया और शर्तें संबंधित चिकित्सा संस्थान के नियमों के अनुसार निर्धारित होती हैं।
राजेश कुमार यादव की पहल समाज को यह प्रेरणा देती है कि मानव जीवन का महत्व केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने में भी है। देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाकर अधिक से अधिक लोगों को चिकित्सा शिक्षा और मानव कल्याण के इस कार्य से जोड़ा जा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा