प्रार्थना सभा में शामिल होने वालों को बताएं समाज का गौरव: सर्व आदिवासी समाज

 


धमतरी, 15 सितंबर (हि.स.)। जिले में लंबे समय से ईसाइयों की प्रार्थना सभा में अन्य समाज के लोग जा रहे हैं। कुछ माह पूर्व प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य कानून-2026 लागू होने के बाद तो इसमें बढ़ोत्तरी हो गई है। बीते डेढ़ से दो माह में ही धमतरी जिले में ईसाइयों की प्रार्थना सभा में भागीदारी के लिए 1,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। अभी भी लोग आवेदन जमा कर रहे हैं। आवेदन जमा करने वालों की संख्या को देखते हुए सर्व आदिवासी समाज ने मंगलवार को जिले के विभिन्न आदिवासी समाजों के प्रमुखों को पत्र जारी किया है।

प्रेसनोट में कहा गया है कि ग्रामीण स्तर पर समाज की बैठक आयोजित कर प्रार्थना सभा में शामिल होने वाले समाज के लोगों को समझाएं। ऐसे लोगों की जानकारी जिला संगठन तक पहुंचाएं। जिले में कई लोगों ने प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए प्रशासन से अनुमति का अनुरोध किया है। इसे देखते हुए समाज प्रमुखों से अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों को चिन्हित कर ग्रामीण स्तर पर बैठक आयोजित करने और उन्हें आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति, आस्था एवं सामुदायिक हितों के संबंध में समझाइश देने कहा गया है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि समझाने के बाद भी यदि संबंधित व्यक्ति प्रार्थना सभा में शामिल होते हैं, तो ऐसे लोगों की सूची समाज के जिला संगठन को उपलब्ध कराई जाए। आदिवासी समाज के सदस्य होने के नाते मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में समाज स्तर पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। साथ ही ऐसे लोगों को आदिवासी समाज के माध्यम से मिलने वाले अधिकारों एवं सुविधाओं से वंचित किए जाने की बात कही गई है। समाज की ओर से समाज प्रमुखों से क्षेत्र की स्थिति की जानकारी जिला संगठन तक पहुंचाने तथा आगामी जिला बैठक से पहले आवश्यक सूची और रिपोर्ट उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि इस विषय पर समाज सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय कर सके।

लोगों को अपनी संस्कृति एवं पहचान के संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए : जीवराखन लाल मरई

सर्व आदिवासी समाज जिला धमतरी के जिलाध्यक्ष जीवराखन लाल मरई ने समाज के सभी प्रमुखों, पदाधिकारी और ग्रामीण प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में बैठक कर लोगों से संवाद करें। आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा, सामाजिक व्यवस्था और आस्था रही है। समाज के लोगों को अपनी संस्कृति एवं पहचान के संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए। किसी भी विषय पर टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय पहले समाज स्तर पर संवाद और समझाइश का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा