बंदूक से तिरंगे तक का सफर, आत्मसमर्पित नक्सली पुलिस जवानों के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह में हुए शामिल
कांकेर, 15 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर स्थित मुल्ला कैंप में कभी बंदूक के साये में रहकर लोकतंत्र और तिरंगे का विरोध करने वाले 27 आत्मसमर्पित नक्सली पुलिस जवानों के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हुए।
मुल्ला कैंप में आयोजित समारोह के दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पुलिस जवानों के साथ मिलकर ध्वजारोहण किया और राष्ट्रध्वज को सलामी दी। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। कभी जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाए थे, उसी व्यवस्था के बीच तिरंगे के नीचे खड़े होकर आजादी का पर्व मनाना उनके जीवन में आए बदलाव की तस्वीर पेश करता है। बंदूक से तिरंगे तक का यह सफर इस संदेश का प्रतीक बन गया कि आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास और सामाजिक स्वीकार्यता के जरिए हिंसा से दूर होकर नई जिंदगी की शुरुआत की जा सकती है।
पुलिस और प्रशासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें नई जिंदगी शुरू करने के लिए शासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को हिंसा के रास्ते से बाहर निकालकर रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है।
मुल्ला कैंप में हुआ यह आयोजन केवल स्वतंत्रता दिवस समारोह नहीं रहा, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलती तस्वीर का प्रतीक भी बना। आत्मसमर्पित नक्सलियों का पुलिस जवानों के साथ तिरंगे के नीचे खड़ा होना बताता है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र और विकास की मुख्यधारा में वापस लौटा जा सकता है। आत्मसमर्पित नक्सलियों का यह कदम उनके व्यक्तिगत बदलाव के साथ-साथ क्षेत्र में शांति और विश्वास की नई उम्मीद को भी दर्शाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे