अम्बिकापुर : ईंट-भट्ठे के गड्ढे को बताया ‘डबरी’, कागजों में लाखों डकारे और जमीन पर लहलहा उठी धान की फसल

 




अम्बिकापुर, 27 अगस्त (हि.स.)। सरगुजा जिले के सीतापुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बनेया में मनरेगा योजना के तहत हुआ डबरी निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। जहां जल संरक्षण के लिए पानी का संचय होना था, वहां आज धान की फसल लहलहा रही है। रोजगार सहायक ने ईंट निर्माण के लिए पहले से खुदे गड्ढे को मनरेगा की डबरी बताकर लाखों रुपयों का आहरण कर लिया। ऑडिट टीम के खुलासे के बावजूद आरोपित पर ठोस कार्रवाई न होना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

जानकारी के मुताबिक, बनेया पंचायत में पंजीकृत मजदूरों को रोजगार देने के उद्देश्य से करीब तीन लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण स्वीकृत हुआ था। यह कार्य ग्राम प्रतापगढ़ निवासी राधेश्याम पिता सुदामा की बनेया स्थित भूमि पर मंजूर किया गया था। उक्त जमीन पर पहले से ईंट बनाने के लिए मिट्टी खोदी गई थी, जिससे वहां गहरा गड्ढा बना हुआ था। रोजगार सहायक ने इसी का फायदा उठाने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत राधेश्याम को हितग्राही बनाया और सारे जरूरी दस्तावेज जुटाकर स्वीकृति हासिल कर ली।

दिखावे के लिए मौके पर दो-चार दिन मजदूरों से केवल मेड़बंदी का काम कराया गया और फिर निर्माण बंद कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और मौका मुआयना न करने की लापरवाही का लाभ उठाते हुए रोजगार सहायक ने कागजों में काम को ‘पूर्ण’ दर्शा दिया। गबन को अंजाम देने के लिए वास्तविक मजदूरों को दरकिनार कर मस्टर रोल में पूर्व सरपंच और अपने करीबियों के नाम दर्ज किए गए और लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई।

बाहर से आई स्पेशल ऑडिट टीम ने जब मौके पर भौतिक सत्यापन किया, तो फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी स्थानीय स्तर पर रोजगार सहायक के खिलाफ सख्त कदम उठाने के बजाय उसे संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं। वर्तमान में कागजों की डबरी पूरी तरह खेत में तब्दील हो चुकी है। इस मामले पर जनपद पंचायत सीईओ जयगोविंद गुप्ता का कहना है कि जांच टीम गठित कर मौके पर भेजी जा रही है और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह