अंबिकापुर : सरगुजा संभाग में धान खरीद की रफ्तार धीमी, उठाव न होने से संकट गहराया
बलरामपुर, 02 जनवरी (हि.स.)। सरगुजा संभाग में इस बार धान खरीद की प्रक्रिया कई मोर्चों पर दबाव में नजर आ रही है। लक्ष्य के मुकाबले खरीद की धीमी गति और समितियों से धान का उठाव न होना आने वाले दिनों में किसानों और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
सरगुजा संभाग के पांच जिलों में 15 नवंबर से 31 दिसंबर तक की स्थिति में महज 40 प्रतिशत धान की ही खरीद हो सकी है। सहकारी समितियों में पहले से जमा धान का उठाव बेहद कम होने के कारण भंडारण की जगह लगभग भर चुकी है। यदि जल्द उठाव नहीं हुआ तो धान खरीद की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
सरगुजा संभाग के पांचों जिलों में धान खरीद का जिम्मा सहकारी बैंक सरगुजा के अधीन है। इस खरीफ विपणन वर्ष में संभाग के लिए एक करोड़ 37 लाख 43 हजार 40 क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। 31 दिसंबर तक 48 लाख 38 हजार 69.80 क्विंटल धान कीखरीद ही हो पाई है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 40 प्रतिशत है।
सबसे गंभीर स्थिति धान उठाव को लेकर सामने आई है। अब तक समितियों से केवल 8.95 प्रतिशत धान का ही उठाव हो सका है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 37 प्रतिशत धान का उठाव हो चुका था। उठाव की धीमी गति से दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक ओर समितियों में भंडारण की जगह खत्म हो रही है, वहीं दूसरी ओर मौसम खराब होने की आशंका के चलते खुले में रखे धान के भीगने का खतरा बढ़ गया है।
इस वर्ष धान खरीद के लिए लागू किए गए नए नियमों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रकबे के पंजीयन में गड़बड़ी और डिजिटल क्रॉप सर्वे में गलत आंकड़ों के कारण कई किसानों का दर्ज रकबा कम हो गया, जिससे वे पूरी उपज बेचने से वंचित हो रहे हैं।
इसके साथ ही ऑनलाइन टोकन व्यवस्था भी विवाद का कारण बन गई है। प्रतिदिन जारी किए जाने वाले टोकन में 70 प्रतिशत ऑनलाइन एप के माध्यम से और 30 प्रतिशत समितियों से ऑफलाइन दिए जा रहे हैं। आरोप है कि ऑनलाइन टोकन बिचौलियों द्वारा पहले ही कटवा लिए जाते हैं, जिससे वास्तविक किसानों को टोकन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
समितियों में धान रखने की जगह लगभग समाप्त हो चुकी है, जबकि अभी करीब 60 प्रतिशत धान की खरीद शेष है और इसके लिए समय भी सीमित है। सरगुजा जिले के दरिमा और सूरजपुर जिले के बतरा सहित कई समितियों में भंडारण की समस्या गंभीर हो गई है। यदि उठाव में तेजी नहीं आई तो खरीदी रोकने जैसी स्थिति भी बन सकती है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, धीमी खरीद, कमजोर उठाव व्यवस्था और तकनीकी अव्यवस्थाओं ने सरगुजा संभाग में धान खरीद को एक बड़े संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इसका खामियाजा किसानों के साथ सहकारी समितियों को भी भुगतना पड़ सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय