शांति फाउंडेशन कोंडागांव बेसहाराें का बना सहारा, मानसिक रोगी बना रहे राखियां

 


कोंडागांव, 23 अगस्त (हि.स.)। मानसिक परेशानी से जूझ रहे और बेसहारा होकर सड़कों पर भटकने वाले लोगों के लिए कोंडागांव स्थित शांति फाउंडेशन संस्था ऐसे लोगों को सिर्फ सड़क से उठाकर आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके इलाज, देखभाल और परिवार से दोबारा मिलाने का प्रयास भी करती है।

स्वस्थ होने के बाद परिजनों का पता चलने पर उन्हें सम्मान के साथ घर पहुंचाने की कोशिश की जाती है। कुछ मामलों में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के स्वस्थ होने के बावजूद उनके परिजन उन्हें वापस स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं। ऐसे लोगों को दोबारा बेसहारा छोड़ने के बजाय संस्था उन्हें छोटे-छोटे कामों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। वर्तमान में संस्था से जुड़े कुछ लोग राखियां बनाकर अपनी आजीविका कमा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद करना नहीं, बल्कि मानसिक परेशानी से उबर चुके लोगों को समाज में उपयोगी और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना है।

शांति फाउंडेशन के अनुसार उनकी टीम मानसिक परेशानी के कारण सड़कों पर भटक रहे या बेसहारा लोगों की तलाश करती है। ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाकर उनकी जरूरत के मुताबिक भोजन, कपड़े और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। संस्था का प्रयास रहता है कि व्यक्ति को सुरक्षित माहौल मिले और उपचार के साथ उसकी मानसिक स्थिति में सुधार हो। इसके बाद उसके परिवार और पहचान की तलाश शुरू की जाती है। शांति फाउंडेशन ऐसे लोगों को दोबारा बेसहारा छोड़ने के बजाय उनकी क्षमता के अनुसार छोटे-छोटे कामों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।

शांति फाउंडेशन के संचालक यतीन्द्र सलाम का कहना है कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को केवल दवा और उपचार की जरूरत नहीं होती, बल्कि अपनेपन, सम्मान और विश्वास की भी आवश्यकता होती है। उन्हाेने बताया कि संस्था का उद्देश्य ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार काम करने का अवसर देना है, ताकि वे स्वयं को बोझ न समझें और सम्मान के साथ जीवन जी सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे