धर्मांतरण के नाम पर विदेशी शक्तियों ने समाज को तोड़ा, वनवासी संस्कृति की रक्षा हमारा सामूहिक दायित्व: डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना

 










वनवासी विकास समिति द्वारा रायपुर में भव्य 'रक्षाबंधन उत्सव' का आयोजन

शबरी कन्या आश्रम की छात्राओं की सुमधुर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

रायपुर, 6 सितंबर (हि.स.)। एक-दूसरे की मान्यताओं और परंपराओं की रक्षा करना ही भारत का मूल स्वभाव है। आज हमारा वनवासी समाज कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। विशेषकर धर्मांतरण की आड़ में विदेशी शक्तियों ने इस सीधे-सरल समाज के सहज विश्वास पर कुठाराघात कर इसे तोड़ने का काम किया है, जो गंभीर चिंतन का विषय है। यह प्रखर विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मध्यक्षेत्र के क्षेत्रीय संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना ने व्यक्त किए। वे आज रविवार को वनवासी विकास समिति, रायपुर महानगर द्वारा शबरी कन्या आश्रम छात्रावास में आयोजित भव्य 'रक्षाबंधन उत्सव' में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

डॉ. सक्सेना ने आगे कहा कि, वनवासी समाज की जीवनशैली और उनकी प्रकृति-पूजक संस्कृति अद्भुत है। यदि हम उनकी व्यवस्थाओं को नहीं बचाएंगे, तो प्रकृति की रक्षा कैसे होगी? हमें वैचारिक और सामाजिक रूप से इन्हें सशक्त कर इनकी प्रगति में सहभागी बनना होगा।

प्रलोभन का खेल बंद न हुआ तो पूरा समाज संकट में आएगा: भीम सिंह कंवर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने अपने विशेष उद्बोधन में कहा कि, तथाकथित विचारधारा के लोगों ने जनजातीय क्षेत्रों में पैठ बनाकर और सुख-सुविधाओं का लालच देकर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया है। हमारी परिवार व्यवस्था और प्रकृति पूजा ही हमारा सबसे बड़ा संबल है। यदि प्रलोभन देकर किया जा रहा यह धर्मांतरण नहीं रुका, तो आने वाले समय में हमारा पूरा समाज गहरे संकट में आ जाएगा। हमें इस समाज की रक्षा का दृढ़ संकल्प लेना होगा।

बेटियों की शिक्षा-दीक्षा अत्यंत सराहनीय: मंजुला कंवर

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित आदर्शिनी महिला मंडल की अध्यक्ष मंजुला कंवर ने आश्रम की व्यवस्थाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि वनवासी कन्याओं को जिस प्रकार संस्कारवान शिक्षा दी जा रही है, वह अत्यंत अनुकरणीय और सराहनीय है। हम सभी को इन बेटियों के उज्जवल भविष्य और सुरक्षा के लिए हरसंभव सहयोग देना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वनवासी विकास समिति के महानगर अध्यक्ष रवि गोयल ने की। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद शबरी कन्या आश्रम में निवास कर रही पूर्वोत्तर की छात्राओं ने सुमधुर समूह गीत और पारंपरिक लोकनृत्य की ऐसी रंगारंग छटा बिखेरी कि पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक अवसर पर अतिथियों द्वारा आश्रम की छात्राओं द्वारा स्वरचित एवं हस्तलिखित अनूठी पुस्तक 'शबरी के बेर' का विमोचन भी किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने खूब सराहा।

300 से अधिक प्रबुद्ध जनों ने लिया हिस्सा, बंधवाया रक्षासूत्र

इस पावन पर्व पर आश्रम की जनजातीय बहनों ने उपस्थित सभी अतिथियों, डॉक्टरों, प्राध्यापकों और प्रबुद्ध नागरिकों को आदरपूर्वक तिलक लगाया और उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का भरोसा जताया। बदले में भाईयों ने भी बहनों की रक्षा और स्वावलंबन का संकल्प लिया। कार्यक्रम में माधवी जोशी, ललिता मुर्मू, रामनाथ कश्यप, डॉ अनुराग जैन, राजीव शर्मा, कृष्ण कुमार वैष्णव, दिलीप दास , तिसेन भगत, श्रीमती संगीता चौबे, श्रीमती रेखा देशपांडे सहित रायपुर महानगर के 300 से अधिक गणमान्य नागरिक और विभिन्न छात्रावासों के विद्यार्थी मौजूद रहे।

वंदेमातरम के साथ समापन और सहभोज

कार्यक्रम का गरिमापूर्ण संचालन प्राची भगत ने, प्रस्तावना श्रीमती सिद्धी दलवी ने तथा आश्रम का वार्षिक प्रतिवेदन अस्मिता दीदी ने प्रस्तुत किया। अंत में रायपुर महानगर के सचिव प्रवीण अग्रवाल ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। सामूहिक 'वंदेमातरम' गान के साथ सभा का समापन हुआ, जिसके बाद सभी उपस्थित जनों ने एक साथ बैठकर सुरुचिपूर्ण सहभोज का आनंद लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर