रायगढ़ में आज चक्रधर समारोह की दूसरी शाम, लोक से शास्त्रीय कला तक सजेगा सांस्कृतिक मंच
रायगढ़ 15 सितंबर (हि.स.)। सांस्कृतिक नगरी रायगढ़ में जारी 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह की दूसरी शाम कला, संगीत और लोक परंपराओं के विविध रंगों से सराबोर होगी। आज मंगलवार की शाम मंच पर लोक संगीत से लेकर कथक, पंडवानी, कुचिपुड़ी, तबला वादन, राजस्थानी लोकनृत्य-संगीत और वृंदावन के भक्तिमय भजनों की प्रस्तुतियां दर्शकों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएंगी।
रामलीला मैदान में शुरू होने वाली सांस्कृतिक संध्या में देश-प्रदेश के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम का आगाज मेघा बोस ताम्रकर, रायपुर के लोक संगीत से होगा। इसके बाद रायगढ़ की गीतिका चक्रधर एकल कथक नृत्य के माध्यम से अपनी प्रस्तुति देंगी। रायपुर की अनुष्का सुल्तानिया कथक की भाव-भंगिमाओं और लयकारी से दर्शकों को आकर्षित करेंगी।
सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की लोकगाथा पंडवानी का ओज भी देखने को मिलेगा। तरुणा साहू एवं ग्रुप, रायपुर पांच कलाकारों के दल के साथ पंडवानी की प्रभावशाली प्रस्तुति देंगे। इसके बाद दिल्ली की टी. लक्ष्मी रेड्डी कुचिपुड़ी नृत्य की शास्त्रीय परंपरा, भाव और लय का मनोहारी प्रदर्शन करेंगी। रात के कार्यक्रम में निशित गंगानी, दिल्ली तीन कलाकारों की संगत के साथ तबला वादन प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद राजस्थान के बाड़मेर की स्टार्क सोसाइटी के 12 सदस्यीय दल द्वारा पारंपरिक राजस्थानी फोक की रंगारंग प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें थार की लोक संस्कृति और संगीत की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।
रात 10 बजे से माधवरस बैंड, वृंदावन के आठ कलाकारों का दल भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देगा। वृंदावन की भक्ति और संगीत से सजी यह प्रस्तुति समारोह की शाम का विशेष आकर्षण होगी और इसी के साथ दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या का समापन होगा।
चक्रधर समारोह की यह शाम भारतीय कला की विविध परंपराओं को एक मंच पर समेटेगी। छत्तीसगढ़ की पंडवानी से लेकर कथक और कुचिपुड़ी की शास्त्रीय अभिव्यक्ति, तबले की ताल, राजस्थान के लोक रंग और वृंदावन की भक्ति-एक ही मंच पर संस्कृति के इन विविध आयामों का संगम देखने को मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान