जांजगीर-चांपा में चार रंग के डिब्बों से होगा कचरे का वैज्ञानिक निपटान

 


जांजगीर-चांपा, 19 जून (हि. स.)। जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कचरे के पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे के मार्गदर्शन में जिलेभर में लोगों को कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर निर्धारित रंग के डिब्बों में संग्रहित करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

प्रशासन का मानना है कि, कचरे का सही वर्गीकरण और स्रोत स्तर पर पृथक्करण न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा, संसाधनों के पुनः उपयोग और स्वच्छता को भी बढ़ावा देगा। इसी उद्देश्य से चार अलग-अलग रंगों के डिब्बों के माध्यम से कचरा प्रबंधन की व्यवस्था लागू की जा रही है।

इस व्यवस्था के तहत हरा डिब्बा गीले कचरे के लिए निर्धारित किया गया है। इसमें फल और सब्जियों के छिलके, बचा हुआ भोजन, पत्तियां तथा अन्य जैविक अपशिष्ट डाले जाएंगे। इस कचरे से कम्पोस्ट और जैविक खाद तैयार की जा सकेगी, जिससे कृषि और बागवानी कार्यों को भी लाभ मिलेगा।

वहीं नीला डिब्बा सूखे कचरे के लिए रखा गया है। इसमें कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी वस्तुएं एकत्रित की जाएंगी। इन सामग्रियों का पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) कर दोबारा उपयोग किया जा सकता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा और कचरे की मात्रा में कमी आएगी।

प्रशासन ने लाल डिब्बे को सेनेटरी कचरे के लिए निर्धारित किया है। इसमें सेनेटरी पैड, डायपर, मास्क, बैंडेज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी अपशिष्ट सुरक्षित रूप से संग्रहित किए जाएंगे। इससे संक्रमण फैलने की संभावना कम होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

इसके अलावा काला डिब्बा विशेष एवं खतरनाक कचरे के लिए रखा गया है। इसमें बैटरी, ट्यूबलाइट, एक्सपायरी दवाइयां, पेंट तथा अन्य रासायनिक पदार्थों का पृथक संग्रहण किया जाएगा। ऐसे कचरे का सामान्य कचरे के साथ निपटान पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए इनके अलग संग्रहण और वैज्ञानिक निपटान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों, संस्थानों और प्रतिष्ठानों में कचरे का स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण करें तथा निर्धारित रंगों के डिब्बों का उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता के बिना स्वच्छता अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है।

जिला प्रशासन का लक्ष्य ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल जिले का निर्माण करना है। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग कचरा प्रबंधन के महत्व को समझें और स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएं।

प्रशासन का मानना है कि स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता ही स्वस्थ समाज और स्वच्छ भारत की मजबूत नींव है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर कचरे का सही पृथक्करण और निपटान सुनिश्चित करे, तो जिले को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/ लालिमा शुक्ला पुरोहित

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हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT