तकनीक आधारित जलापूर्ति व्यवस्था के लिए लगाया जा रहा साढे सात करोड़ का स्केडा सिस्टम

 


जगदलपुर, 09 सितंबर (हि.स.)। नगर पालिक निगम जगदलपुर जलापूर्ति व्यवस्था को तकनीक आधारित और डेटा संचालित बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए अमृत मिशन के तहत स्केडा सिस्टम लगभग साढे सात करोड़ रुपये का सिस्टम लगाया जा रहा है। सिस्टम लागू होने के बाद निगम के कंट्रोल रूम में बैठकर ही शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा सकेगी।

किस टंकी में कितना पानी है, कौन सा पंप चल रहा है, कहां पानी का दबाव कम है और किस लाइन में गड़बड़ी की आशंका है, इसकी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। नगर निगम क्षेत्र में पानी सप्लाई के लिए 19 पानी टंकियां बनाई गई हैं। इनमें से कई टंकियों का उपयोग वर्तमान में जलापूर्ति के लिए किया जा रहा है।

निगम के सब इंजीनियर अमर कश्यप ने बुधवार काे बताया कि अमृत मिशन के तहत स्केडा सिस्टम को लगाने मे करीब सात करोड़ 50 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इस सिस्टम के लगने का फायदा निगम को मिलेगा। 19 टंकियां निगम क्षेत्र में निर्मित करीब 17 टंकियां वर्तमान में पानी सप्लाई में उपयोग 25 हजार कनेक्शन स्मार्ट मीटर लगाने की योजना है। 350 किमी पाइपलाइन नेटवर्क विस्तार की योजना है। स्काडा सिस्टम से पूरी व्यवस्था की डिजिटल निगरानी से पानी की बचत, लीकेज और बहाव की पहचान आसान हाेगा। बिजली की बचत, जरूरत के अनुसार पंप संचालन संभव हाेगा। कम शिकायतें, सप्लाई प्रभावित होने वाले क्षेत्र का तुरंत पता चलेगा। बेहतर प्लानिंग, मांग और खपत के आंकड़ों के आधार पर वितरण तय होगा। {कम मानवीय निर्भरता, मौके पर बार-बार जांच की जरूरत घटेगी। पारदर्शी व्यवस्था, पानी की सप्लाई और खपत का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।

अमृत मिशन के प्लांट प्रभारी राज किरन ने बताया कि यह सिस्टम सभी 19 टंकियों में लगाया जाएगा। निगरानी के लिए लगाई जाने वाली स्क्रीन एक महीने के अंदर लग जाएगा। उम्मीद की जा रही है यह काम करीब एक महीने के अंदर पूरा हो जाएगा। उन्हाेने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में टंकी का जलस्तर, पंप की स्थिति या सप्लाई में आई खराबी का पता लगाने के लिए कर्मचारियों को मौके पर जाकर जांच करनी पड़ती है।

स्काडा लागू होने के बाद सेंसर और डिजिटल उपकरणों से प्राप्त जानकारी सीधे केंद्रीय कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। यानी टंकी का जलस्तर कम होते ही सिस्टम इसकी जानकारी देगा। स्काडा से निगम को जलापूर्ति का पूरा डेटा मिलेगा। किस समय किस क्षेत्र में कितनी मांग है, कितनी मात्रा में पानी भेजा गया और कितना पानी वितरण के दौरान कम हुआ-इसका आकलन किया जा सकेगा। इससे पंपों को आवश्यकता के अनुसार चलाने में मदद मिलेगी और बिजली की खपत भी नियंत्रित की जा सकेगी। इसके साथ ही करीब 25 हजार पानी कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना से उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत का रिकॉर्ड तैयार होगा। स्काडा और स्मार्ट मीटर का डेटा मिलकर भविष्य में जलापूर्ति की योजना बनाने में निगम के लिए उपयोगी साबित हो सकता है

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे