रबी फसलों के बीजों की विक्रय दरें निर्धारित, गेहूं से लेकर दलहन-तिलहन तक के भाव जारी
आधार बीज प्रमाणित बीज से 100 रुपये प्रति क्विंटल महंगा, किसानों को निर्धारित दरों पर मिलेंगे बीज
धमतरी, 15 अक्टूबर (हि.स.)। रबी सीजन 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम ने अनाज, दलहन और तिलहन फसलों के आधार एवं प्रमाणित बीजों की विक्रय दरें निर्धारित कर दी हैं। राज्य स्तरीय बीज विक्रय दर निर्धारण समिति की अनुमोदित दरों के अनुसार किसानों को विभिन्न फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। निर्धारित दरें किसानों को बीज विक्रय के लिए लागू होंगी।
वहीं, सेवा सहकारी समितियों को चार प्रतिशत कमीशन घटाकर देयक जारी किए जाएंगे। जारी दरों में गेहूं की बौनी एवं ऊंची किस्मों के साथ चना, मटर, मसूर, मूंग, उड़द, तिवड़ा, तोरिया, सरसों, अलसी, कुसुम और मूंगफली के बीज शामिल हैं। प्रमुख फसलों के प्रमाणित बीजों की दरें रुपये प्रति क्विंटल में निर्धारित की गई हैं। गेहूं की बौनी किस्मों के लिए 10 वर्ष के अंदर की किस्मों की दर 3,629 रुपये और 10 वर्ष से अधिक अवधि वाली किस्मों की दर 4,050 रुपये तय की गई है। गेहूं की ऊंची किस्मों के लिए दर 4,057 रुपये है। चने की दर क्रमशः 8,218 और 10,176 रुपये, मटर की 8,806 और 9,558 रुपये तथा मसूर की 12,543 और 12,634 रुपये निर्धारित की गई है। मूंग के बीज की दर 13,469 और 14,032 रुपये, जबकि उड़द की दर 14,299 और 13,871 रुपये तय की गई है। तिवड़ा की सभी किस्मों के लिए 6,456 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित है।
तोरिया की 10 वर्ष के अंदर की किस्मों के लिए दर 10,232 रुपये और सरसों के लिए क्रमशः 9,711 तथा 8,653 रुपये है। अलसी के बीज की दर 12,237 और 13,317 रुपये, कुसुम की सभी किस्मों की दर 8,401 रुपये तथा मूंगफली की दर 12,903 और 12,391 रुपये तय की गई है। निगम के परिपत्र के अनुसार आधार बीजों की दर संबंधित प्रमाणित बीजों से 100 रुपये प्रति क्विंटल अधिक होगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, मिशन फॉर आत्मनिर्भर इन पल्सेस तथा नई किस्मों के बीजों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के तहत फसलवार लक्ष्य निर्धारित होने के बाद अलग विक्रय दरें तय की जाएंगी। इन योजनाओं के अंतर्गत लागू दरों की जानकारी कृषि संचालनालय द्वारा पृथक से जारी की जाएगी। निगम के अनुसार उत्पादन अनुदान केवल निगम द्वारा उत्पादित बीजों की मात्रा पर देय होगा। निर्धारित दरों और अनुदान संबंधी प्रावधानों से किसानों तथा सहकारी समितियों को बीज वितरण की प्रक्रिया में स्पष्टता मिलेगी और रबी सीजन में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा