कोरिया: मनरेगा के पक्के शेड से बदली तस्वीर, रामलाल का बकरी पालन बना स्थायी रोजगार
कोरिया, 01 जनवरी (हि.स.)। वनांचल क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से किए जाने वाले बकरी पालन को अब सरकारी योजनाओं का सहारा मिल रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत हो रही है।
कोरिया जिले के सोनहत जनपद पंचायत मुख्यालय ग्राम निवासी रामलाल के जीवन में मनरेगा योजना के तहत बने पक्के बकरी पालन शेड ने बड़ा बदलाव लाया है। इस सुविधा के बाद बकरी पालन न सिर्फ आसान हुआ है, बल्कि यह उनके परिवार के लिए एक लाभदायक और स्थायी रोजगार का साधन बन गया है।
रामलाल बताते हैं कि पहले उनका कच्चा मकान था और उसी के एक हिस्से में वे कुछ बकरियां रखते थे। मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण बकरियों की देखभाल कठिन हो जाती थी और कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता था। गांव में ही एक अन्य किसान के पक्के बकरी शेड से प्रेरित होकर उन्होंने अपने लिए भी इस सुविधा की मांग रखी। ग्राम पंचायत द्वारा आवेदन की अनुशंसा किए जाने के बाद महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत उनके लिए पक्के बकरी पालन शेड की स्वीकृति मिली।
लगभग एक लाख पच्चीस हजार रुपये की लागत से ग्राम पंचायत द्वारा समय पर पक्का बकरी शेड तैयार किया गया। इस शेड के बन जाने के बाद रामलाल अब एक उन्नत बकरी पालक के रूप में बड़ी संख्या में बकरियों का पालन कर रहे हैं। वीबी जीरामजी योजना के तहत बनी इस संरचना से बकरी पालन अब उनके लिए एक व्यवस्थित व्यवसाय का रूप ले चुका है। वर्तमान में वे एक दर्जन से अधिक बकरियों का पालन कर रहे हैं और पूरे परिवार की सहभागिता से यह कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।
रामलाल का कहना है कि बाजार में बकरे की मांग हमेशा बनी रहती है। ग्राहक स्वयं उनके घर आकर बकरे खरीद ले जाते हैं और उन्हें उचित कीमत भी मिल रही है। पिछले महीने ही उन्होंने चार बकरे बेचकर करीब तीस हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। हर दो-तीन माह में नियमित आय होने से अब रोजगार को लेकर उनकी चिंता समाप्त हो गई है।
कुल मिलाकर, मनरेगा योजना के तहत बने पक्के बकरी पालन शेड ने रामलाल जैसे ग्रामीण परिवार के लिए पारंपरिक कार्य को आजीविका का मजबूत आधार बना दिया है। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि भविष्य को लेकर आत्मविश्वास और निश्चिंतता भी बढ़ी है।
हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह