सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का अनूठा समागम, सरगुजा के गौरवशाली रामगढ़ महोत्सव का भव्य शुभारंभ
अम्बिकापुर, 29 जून (हि.स.)। आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर सरगुजा अंचल की गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत के प्रतीक दो दिवसीय 'रामगढ़ महोत्सव-2026' का सोमवार को रंगारंग और भव्य शुभारंभ हुआ।
इस प्रतिष्ठित महोत्सव का उद्घाटन प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने पारंपरिक गरिमा और उल्लास के बीच किया। लोक संस्कृति, साहित्य, पुरातत्व और पर्यटन के इस अद्भुत समागम के पहले दिन स्थानीय स्कूली बच्चों और कलाकारों ने अपनी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं नई दिल्ली से आए कला साधकों द्वारा मंचित भव्य रामलीला इस उद्घाटन समारोह का मुख्य आकर्षण रही। महोत्सव के भव्य शुभारंभ अवसर पर क्षेत्र के सांसद चिंतामणि महाराज, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज सहित भारी संख्या में जनप्रतिनिधि, इतिहासकार, साहित्यकार और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही है। रामगढ़ महोत्सव के गौरवमयी 50 वर्ष पूर्ण होने पर सभी को स्वर्ण जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह महोत्सव प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और पुरातत्व को आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम साबित होगा। उन्होंने महत्वपूर्ण घोषणा भी की कि इस दो दिवसीय भव्य आयोजन के समापन समारोह में सूबे के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे।
राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए संस्कृति मंत्री ने कहा कि रामगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। महोत्सव के दौरान देश-विषेश से आने वाले आगंतुकों और शोधकर्ताओं को विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात 'सीताबेंगरा गुफा', ऐतिहासिक 'जोगीमारा गुफा', सुरम्य रामगढ़ पर्वत श्रृंखला तथा अन्य पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है।
समारोह को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सांसद चिंतामणि महाराज ने रामगढ़ को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का एक अमूल्य स्तंभ बताया। उन्होंने पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी सुदृढ़ मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने अपने चौदह वर्षों के वनवास काल का एक महत्वपूर्ण समय इसी पावन धरा पर व्यतीत किया था। इसके साथ ही उन्होंने साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाकवि कालिदास ने अपनी कालजयी कृति 'मेघदूतम्' की रचना इसी मनोरम स्थल पर की थी। उन्होंने सीताबेंगरा, जोगीमारा, राम-जानकी मंदिर तथा हाथीपोल जैसे अद्वितीय स्थलों की वैश्विक पर्यटन क्षमता को रेखांकित करते हुए आह्वान किया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से रामगढ़ को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई जाएगी।
कार्यक्रम में लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि रामगढ़ केवल धार्मिक आस्था का ही केंद्र नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक और साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध और मूल्यवान स्थल है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत वैश्विक पर्यटन की अपार संभावनाओं को खुद में समेटे हुए है, जिसे अंतरराष्ट्रीयस्तर पर प्रचारित और संरक्षित करना समय की मांग है। वहीं, जिला कलेक्टर अजीत वसंत ने सभी अतिथियों और नागरिकों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि रामगढ़ महोत्सव सरगुजा की प्राचीन विरासत को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का एक उत्कृष्ट मंच है। इस आयोजन में स्थानीय लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे अंचल की छिपी हुई प्रतिभाओं को अपनी कला के प्रदर्शन का बेहतरीन अवसर मिला है।
इस ऐतिहासिक महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवनारायण यादव, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, पूर्व सांसद कमलभान सिंह मरावी, जिला पंचायत सदस्य राधा रवि व रायमुनिया कुरियम, जनपद पंचायत अध्यक्ष आलोक सिंह, उपाध्यक्ष सिद्धार्थ सिंह, पार्षद आलोक दुबे तथा एल्डरमैन करता राम गुप्ता विशेष रूप से मंच पर आसीन रहे। इसके साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, प्रबुद्ध साहित्यकार और हजारों की संख्या में कलाप्रेमी नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने इस भव्य सांस्कृतिक अनुष्ठान के प्रथम दिन की गरिमा बढ़ाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह