रियासतकाल परंपरानुसार मां दंतेश्वरी को अर्पित किया गया रक्षासूत्र

 


दंतेवाड़ा, 28 अगस्त (हि.स.)। जिले के शक्ति पीठ मां दंतेश्वरी मंदिर में शुक्रवार काे रियासतकाल परंपरानुसार राखी को त्योहार में मां दंतेश्वरी की विशेष पूजा अर्चना कर बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को कच्चे धागे से तैयार विशेष रक्षासूत्र अर्पित करने की परंपरा का निर्वहन किया गया। मां दंतेश्वरी को रक्षासूत्रअर्पण करने के पश्चात मंदिर में विराजमान अन्य देवी-देवताओं को भी रक्षासूत्र बांधने की परंपरा निभाई गई। इसके बाद मंदिर के पुजारी और सेवादार मां दंतेश्वरी के प्रसाद स्वरूप रक्षासूत्र को एक-दूसरे की कलाइयों पर बांधकर सुख-समृद्धि की कामना की।

मां दंतेश्वरी के लिए सेवादारों द्वारा कच्चे धागे से विशेष राखी तैयार की गई। रक्षासूत्र तैयार होने के बाद इसे परंपरानुसार मंदिर से जुड़े सेवादार, मांझी, भंडारी, राउत और टुड़पा द्वारा गाजे-बाजे के साथ नारायण मंदिर के पास स्थित शीतला सरोवर ले जाया गया। शीतला सरोवर में रक्षासूत्र को जल से पवित्र कर गुड़, पुष्प, चंदन और कुमकुम अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई. पूजा के बाद रक्षासूत्र को वापस दंतेश्वरी मंदिर लाकर कलश स्थापना कक्ष में रखा गया। इसके बाद कच्चे धागे से तैयार विशेष राखी मां दंतेश्वरी को अर्पित की गई।

मां दंतेश्वरीमंदिर दंतेवाड़ा के पुजारी शंभूनाथ के अनुसार यह परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। सबसे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में परंपरानुसार रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। मंदिर में पर्व संपन्न होने के बाद ही क्षेत्र की जनता द्वारा पर्व मनाने की परंपरा है। बदलते समय के बावजूद दंतेश्वरी मंदिर में आज भी इस प्राचीन परंपरा का विधि-विधान के साथ निर्वहन किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे