28 अगस्त को राखी पर्व, बाजार में उमड़ी भीड़

 


मिठाई और फल की दुकानों में भी बढ़ी चहल-पहल

धमतरी, 27 अगस्त (हि.स.)। भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन 28 अगस्त को पूरे अंचल में मनाया जाएगा। पर्व को लेकर धमतरी शहर के बाजारों में रौनक दिखाई दी। राखियों की दुकानों पर बहनों की भीड़ उमड़ रही है। बाजार में पांच रुपये से लेकर 500 रुपये तक की रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां उपलब्ध हैं। विभिन्न कंपनियों की राखियों के साथ डिजाइनर राखियां भी बहनों को खूब पसंद आ रही हैं।

रक्षाबंधन से एक दिन पहले गुरुवार को मकई चौक शनि मंदिर के सामने, बालक चौक, गोल बाजार, सदर मार्ग, रामबाग क्षेत्र सहित शहर के अन्य स्थानों पर लगी अस्थायी राखी दुकानों में दिनभर खरीदारों की भीड़ रही। शहर के अलावा आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण खरीदारी के लिए पहुंचे। गुरुवार को बाजार में सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक चहल-पहल देखने को मिली। मौसम साफ रहने से खरीदारी के लिए निकले लोगों को भी राहत रही।

राखी विक्रेता मोहन साहू, गोल्डी सिन्हा ने बताया कि करीब सप्ताहभर से राखियों की बिक्री जारी है और इस वर्ष राखियों की कीमतों में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। राखियों के साथ मिठाई और फल की दुकानों में भी ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है। रक्षाबंधन के लिए दुकानों में गुलाब जामुन, पेड़ा, कलाकंद, नारियल बर्फी सहित कई तरह की मिठाइयां सजाई गई हैं, जिनकी अच्छी बिक्री हो रही है। वहीं नारियल, केला, सेब और अन्य फलों की मांग भी बढ़ी है।

चांदी वाली राखियों का भी बढ़ा आकर्षण

समय के साथ राखियों के स्वरूप और पसंद में भी बदलाव आया है। कभी फोम वाली राखियों का चलन था, लेकिन अब डोर वाली राखियों के साथ चांदी की राखियां भी बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। हालांकि इनकी कीमत अधिक होने के कारण खरीदारों की संख्या सीमित है, फिर भी लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। सराफा व्यवसायी साकेत लुनावत ने बताया कि बाजार में चांदी की राखियां 500 रुपये से लेकर करीब 2500 से 3000 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं। कई लोग भाई के लिए चांदी की राखी खरीदना पसंद कर रहे हैं।

बाजार से गायब हुईं बांस और बीज से बनी राखियां

एक समय पर्यावरण संरक्षण और महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से गोबर, बांस और बीज से तैयार राखियों को बाजार में बढ़ावा दिया गया था। जिला प्रशासन की पहल पर समूह की महिलाओं को राखी निर्माण का प्रशिक्षण भी दिया गया था। ग्राम छाती के मल्टी यूटिलिटी सेंटर में महिलाओं को राखी व्यवसाय से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था। इन राखियों में गोबर से निर्मित राखी, सीडयुक्त राखी, बांस की कलाकृति और भैया-भाभी राखियां शामिल थीं। हालांकि इस बार बाजार में ऐसी राखियां नजर नहीं आ रही हैं। इसके बावजूद पारंपरिक से लेकर आधुनिक डिजाइन की राखियों ने बाजार में अपनी जगह बना ली है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा