छग विधान सभा :राजधानी रायपुर हत्या, लूट और अपहरण के मामलों में दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े जिलों से आगे

 


रायपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए अपराध आंकड़ों के अनुसार, राजधानी रायपुर हत्या, लूट और अपहरण के मामलों में दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े जिलों से काफी आगे है। गृह विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार नारायणपुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, और सुकमा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में अपराधों की दर्ज संख्या कम है।

गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा विधान सभा में आज जवाब में उपलब्ध में कराए गए 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2025 और 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में अपहरण के मामलों में स्पष्ट रूप से वृद्धि देखी गई है।

अपहरण की घटनाओं में राजधानी रायपुर प्रदेश में सबसे आगे है और यहाँ के आंकड़ों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।रायपुर में वर्ष 2024-25 में दर्ज 524 मामलों से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 634 मामले हो गए। बिलासपुरमें इस अवधि में आंकड़े 331 से बढ़कर 438 मामले तक पहुंच गए।दुर्ग में मामलों की संख्या 229 से बढ़कर 365 पर पहुंच गई।

विभिन्न जिलों में हत्या के मामलों में स्थिरता या आंशिक कमी/वृद्धि देखी गई है।रायपुर में हत्या के मामलों में मामूली कमी आई है। संख्या 85 से घटकर 84 हुई है।बिलासपुर में भी कमी देखी गई है, जहां 59 से घटकर 50 हो गए हैं। वहीं दुर्ग में यहाँ हत्या के मामले 53 से बढ़कर 60 हो गए हैं।

लूट की घटनाओं में अधिकांश बड़े शहरों में स्थिरता है या मामूली बदलाव आया है। रायपुर में लूट के मामलों में मामूली कमी आई है, जो 66 से घटकर 64 हो गई। बिलासपुर में मामलों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जो 31 से बढ़कर 34 हो गई है। वहीं दुर्ग में यहाँ लूट के मामलों में गिरावट आई है, जो 43 से घटकर 27 रह गई है।

विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधायक उमेश पटेल ने प्रदेश में पिछले दो वर्षों में हत्या, लूट, अपहरण, हिरासत में मृत्यु, जेल में मृत्यु को लेकर सवाल पूछा। उप मुख्यमंत्री (गृह) विजय शर्मा ने अपने जवाब में बताया कि हत्या, अपहरण सहित गंभीर अपराधों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। समय-सीमा में चालान प्रस्तुत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अपराधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

गृह मंत्री ने बताया कि महिला थाना, साइबर थाना, सामुदायिक पुलिसिंग, जन-चौपाल और त्वरित कानूनी कार्रवाई के माध्यम से कानून-व्यवस्था मजबूत की गई है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए “हेलो सिस्टर” अभियान और “अभिव्यक्ति” मोबाइल ऐप के जरिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके साथ संवेदनशील क्षेत्रों में बीट व्यवस्था, सघन पेट्रोलिंग और सतत निगरानी से अपराध नियंत्रण सुनिश्चित किया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा