बलरामपुर : मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़, झोलाछाप डॉक्टरों पर नहीं हो रही कार्रवाई
बलरामपुर, 08 जून (हि.स.)। जिले के रामानुजगंज सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में एक बार फिर झोलाछाप डॉक्टरों का जाल तेजी से फैलता नजर आ रहा है। महावीरगंज, विजयनगर, सनावल समेत कई गांवों में बिना मान्यता और बिना चिकित्सकीय योग्यता वाले लोग खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन कथित डॉक्टरों का कारोबार वर्षों से जारी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अब विभाग की कार्यप्रणाली और मंशा दोनों सवालों के घेरे में हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को तत्काल राहत देने के नाम पर हाई डोज एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड और अन्य शक्तिशाली दवाइयां धड़ल्ले से दे रहे हैं। मरीजों को कुछ समय के लिए राहत तो मिल जाती है, लेकिन इसके गंभीर दुष्परिणाम बाद में सामने आते हैं। कई मामलों में गलत इलाज और लापरवाही के कारण मरीजों की जान तक चली गई है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
रामानुजगंज और आसपास के क्षेत्रों में कई मेडिकल स्टोर संचालकों ने अपनी दुकानों को ही क्लीनिक का रूप दे दिया है। कहीं इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं तो कहीं बेड लगाकर मरीजों को भर्ती तक किया जा रहा है। बिना किसी वैध अनुमति के इलाज का यह खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खामोशी दिखाई देती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इन गतिविधियों की पूरी जानकारी है। शिकायतें भी कई बार की गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि कहीं न कहीं इन झोलाछाप डॉक्टरों को विभागीय संरक्षण प्राप्त है। आखिर ऐसा क्या कारण है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर हाथ डालने से जिम्मेदार अधिकारी बचते नजर आते हैं?
लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. महेश गुप्ता द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। सवाल यह है कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध क्लीनिक और झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें रोकने में असफल क्यों है?
विभागीय बैठकों और सरकारी रिपोर्टों में अवैध चिकित्सा पर रोक लगाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में मरीज आज भी अपात्र और अनुभवहीन लोगों के भरोसे इलाज कराने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का फायदा उठाकर झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीणों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित एंटीबायोटिक और गलत दवाओं का उपयोग न केवल मरीज की जान के लिए खतरा है, बल्कि भविष्य में दवा प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) जैसी गंभीर समस्या को भी जन्म दे सकता है।
इस संबंध में आज मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. विजय कुमार सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही बीएमओ को निर्देशित कर जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय