सीधे जरूरतमंदों की मदद को प्राथमिकता, एक बच्चे की बचाई जान

 


धमतरी, 11 अप्रैल (हि.स.)। नयापारा वार्ड निवासी 50 वर्षीय सोनू निर्मलकर ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश करते हुए 20वीं बार रक्तदान किया है। इस बार उन्होंने नगरी क्षेत्र के 14 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार बच्चे को रक्त देकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्ष 1999 में शुरू हुआ उनका रक्तदान का सफर आज भी पूरी निष्ठा के साथ जारी है। खास बात यह है कि सोनू निर्मलकर किसी औपचारिक शिविर में रक्तदान करने के बजाय सीधे जरूरतमंदों की सहायता को प्राथमिकता देते हैं।

उनका पहला रक्तदान एक प्रसवग्रस्त महिला की मदद के लिए हुआ था, जिसके बाद उन्होंने इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी बना लिया। समय के साथ यह सेवा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई और जब भी किसी को रक्त की आवश्यकता होती है, वे बिना देर किए सहायता के लिए पहुंच जाते हैं। हाल ही में एक मित्र के माध्यम से उन्हें नगरी क्षेत्र के एक बीमार बालक की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही वे तुरंत अस्पताल पहुंचे और रक्तदान कर बच्चे की जान बचाने में सहयोग किया। उनकी इस पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे केवल बातों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से समाजसेवा में विश्वास रखते हैं।

सोनू निर्मलकर ने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में एक निजी संस्थान में कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं। नौकरी के साथ-साथ वे समाजसेवा के इस कार्य को भी पूरी लगन और समर्पण से निभा रहे हैं। उनका मानना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि यह सीधे किसी की जिंदगी बचाने से जुड़ा होता है। वे युवाओं से भी अपील करते हैं कि वे आगे आएं, रक्तदान के महत्व को समझें और जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहें। सोनू निर्मलकर जैसे लोग समाज में मानवता की जीवंत मिसाल हैं, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के निरंतर सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा