बंदी संजय बघेल की मौत मामला : पुलिस ने सीसीटीवी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दी सफाई
रायगढ़ 16 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में आबकारी एक्ट के मामले में गिरफ्तार किए गए बंदी संजय बघेल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उठे आरोपों और सवालों के बीच रायगढ़ पुलिस ने अपना विस्तृत पक्ष सार्वजनिक किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने आज मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा करते हुए थाना परिसर में मारपीट के आरोपों को निराधार बताया।
पुलिस के मुताबिक, 10 जून 2026 की सुबह लगभग 11:00 बजे थाना कोतरारोड पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति अरसीपाली चौक के आगे मुख्य मार्ग से अंदर अवैध रूप से कच्ची महुआ शराब रखकर परिवहन की तैयारी में है। इस सूचना पर प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू और आरक्षक शंभू चौहान ने थाना प्रभारी को अवगत कराया। इसके बाद गवाह सुरेश सिंह ठाकुर और चन्द्रप्रकाश भट्ट को साथ लेकर मौके पर दबिश दी गई।
पुलिस ने एक व्यक्ति को सफेद रंग की प्लास्टिक बोरी के साथ पकड़ा। पूछताछ में उसने अपना नाम संजय बघेल (32 वर्ष), पिता प्यारेलाल बघेल, निवासी ग्राम नवापारा (थाना कोतरारोड) बताया। प्लास्टिक बोरी की तलाशी लेने पर उसके अंदर हाथ भट्टी से निर्मित कुल 30 लीटर कच्ची महुआ शराब बरामद हुई । अवैध शराब को विधिवत जब्त कर आरोपित संजय बघेल को उसी दिन दोपहर 12:43 बजे थाना लाया गया।
थाना कोतरारोड लाने के बाद आरोपित संजय को बंदीगृह के बाहर बैठाया गया और उसके परिजनों को कार्रवाई की सूचना दी गई। सूचना पाकर संजय का भाई अजय बघेल और परिवार का सदस्य राकेश बघेल थाना पहुंचे। पुलिस ने आबकारी प्रकरण की समस्त वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 10 जून को ही दोपहर 14:15 बजे संजय की विधिवत गिरफ्तारी दर्ज की और इसकी सूचना उसके भाई अजय बघेल को दी गई। पुलिस ने बताया कि उसी दिन थाने में चर्चित नकली शराब प्रकरण के आरोपित सुभाष पटेल के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा रही थी और दोनों आरोपितों को एक साथ बंदीगृह के बाहर ही बैठाया गया था।
एसएसपी द्वारा मीडिया को दिखाए गए सीसीटीवी फुटेज में दोपहर 14:21 बजे संजय बघेल स्पष्ट रूप से आराम करता नजर आ रहा है। फुटेज में साफ है कि संजय द्वारा पानी मांगने पर पुलिसकर्मियों ने उसे पानी उपलब्ध कराया और अन्य आरोपितों की तरह उसे दोपहर का भोजन भी दिया गया। गिरफ्तारी की सूचना के बाद थाना पहुंचे परिजनों की उपस्थिति में, संजय पुलिस की निगरानी में थाना परिसर के बरामदे में अपने परिवार वालों से मिलता और बातचीत करता हुआ दिखाई देता है।
उसी शाम संजय बघेल और सह-आरोपित सुभाष पटेल को चिकित्सीय परीक्षण, एमसीयू (फिंगर प्रिंट) और न्यायालय में रिमांड पेशी के लिए थाने से रवाना किया गया। शाम 16:35 बजे के सीसीटीवी फुटेज में संजय सामान्य रूप से बाहर निकलता दिखा है। पुलिस के अनुसार, मेडिकल परीक्षण के दौरान संजय बघेल ने चिकित्सक को किसी भी प्रकार की चोट या शारीरिक तकलीफ की कोई जानकारी नहीं दी थी और मेडिकल रिपोर्ट में उसे पूर्णतः फिट बताया गया था। इसके विपरीत, सह-आरोपित सुभाष पटेल ने स्वयं को हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) का मरीज बताया था।
शाम लगभग 18:30 बजे पुलिस बल द्वारा दोनों आरोपिताें को जेल भेजा गया। जेल परिसर में भी संजय के परिवार का सदस्य राकेश बघेल उपस्थित था, जिसने संजय को दिलासा दिया था कि वह जल्द ही उसकी जमानत करा लेगा। इन तमाम साक्ष्यों के आधार पर पुलिस का दावा है कि शराब रेड की कार्रवाई से लेकर थाना लाने, मेडिकल कराने और जेल दाखिल करने तक कहीं भी संजय बघेल के साथ अभद्रता या मारपीट नहीं हुई है।
मृतक संजय बघेल के परिजनों द्वारा आबकारी प्रकरण में पुलिसकर्मियों पर अवैधानिक रूप से रुपये लेने (रिश्वत) की जो शिकायत की गई है, पुलिस महकमे ने उसे गंभीरता से लिया है। इस शिकायत पर प्रकरण के जांचकर्ता प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू और हमराह आरक्षक शंभू चौहान को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है। उक्त शिकायत की विस्तृत और निष्पक्ष जांच डीएसपी (मुख्यालय) द्वारा कराई जा रही है।
मामले में सबसे अहम मृतक संजय बघेल के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस ने बताया कि मृतक के शरीर पर पाई गई चोटों को मृत्यु का कारण नहीं बताया गया है। मृत्यु के स्पष्ट कारणों का सटीक निर्धारण करने के लिए हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच और जब्त विसरा के परीक्षण कराए जाने की चिकित्सकीय राय दी गई है। जिला पुलिस रायगढ़ का कहना है कि वे इस पूरी न्यायिक जांच में पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहे हैं और जांच निष्कर्षों के आधार पर ही प्रकरण में आगे की आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान