अम्बिकापुर : सरगवां में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

 




अम्बिकापुर, 09 जुलाई (हि.स.)। सरगुजा जिला मुख्यालय से सटे सरगवां सब स्टेशन क्षेत्र में इन दिनों बिजली विभाग की लापरवाही के कारण हाहाकार मचा हुआ है। पिछले कई दिनों से क्षेत्र में प्रतिदिन 7 से 8 घंटे तक की जा रही अघोषित और लगातार बिजली कटौती ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

बारिश और उमस के इस मौसम में घंटों बिजली गायब रहने से न सिर्फ आम जनजीवन पटरी से उतर गया है, बल्कि किसानों, विद्यार्थियों और छोटे व्यापारियों को भी भारी मानसिक व आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि विभाग हर बार मेंटेनेंस का हवाला देकर बिजली गुल कर देता है, लेकिन धरातल पर व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बावजूद बिजली विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जिससे नाराज होकर अब उपभोक्ताओं ने सीधे आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

अधिकारियों की इस घोर उदासीनता के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश अब सीधे डिजिटल माध्यमों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक पहुँचने लगा है। क्षेत्र के प्रभावित नागरिकों ने एकजुट होकर इस गंभीर समस्या के खिलाफ छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के उच्च अधिकारियों समेत सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को ईमेल के जरिए शिकायत पत्र भेजा है।

इस शिकायत में मांग की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन तुरंत हस्तक्षेप करे और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है; अगर सच में काम हो रहा है, तो विभाग को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि रोज़ाना घंटों बिजली गुल रहने के पीछे की असली वजह क्या है।

समस्या का जल्द समाधान न होने पर अब ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर जन-आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सरगवां सब स्टेशन से जुड़े तमाम गांवों के नागरिकों ने प्रशासन और विद्युत मंडल को दो टूक शब्दों में एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि, यदि आगामी सात दिनों के भीतर अनावश्यक कटौती बंद कर निर्बाध बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीणों ने यह भी साफ कर दिया है कि इस आंदोलन के दौरान यदि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती है, तो उसकी पूरी जवाबदेही और जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित विद्युत विभाग और प्रशासन की होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह