सूरज की रोशनी से बदली भूपेन्द्र की जिंदगी : सोलर पैनल से मिला राहत का उजाला

 


धमतरी, 02 अप्रैल (हि.स.)। ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया कदम अब आम लोगों की जिंदगी में साफ बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से न केवल बिजली बिल का बोझ कम हो रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की सोच भी तेजी से बढ़ रही है।

धमतरी के महात्मा गांधी वार्ड निवासी डॉ. भूपेन्द्र साहू इसकी एक जीवंत मिसाल बनकर सामने आए हैं। उन्होंने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर तीन किलोवॉट का सोलर प्लांट स्थापित कराया और अब उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो चुका है। डॉ. भूपेंद्र साहू बताते हैं कि योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने आवेदन किया। प्रक्रिया सरल और पारदर्शी रही, जिसके चलते महज 15 दिनों के भीतर उनके घर में सोलर पैनल लग गया। पहले जहां हर महीने बढ़ते बिजली बिल की चिंता रहती थी, वहीं अब सौर ऊर्जा के जरिए उन्हें नि:शुल्क और निर्बाध बिजली मिल रही है।

उन्होंने बताया कि अब वे केवल अपनी जरूरत की बिजली ही नहीं बना रहे, बल्कि अतिरिक्त बिजली को नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड में भेजकर भविष्य में आय की संभावना भी बना रहे हैं। यह योजना सिर्फ व्यक्तिगत राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर समाज और पर्यावरण दोनों पर दिखाई दे रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है, वहीं सोलर इंस्टॉलेशन और रखरखाव के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। योजना के तहत 30 हजार से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलने से मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी सोलर प्लांट लगाना आसान हो गया है। साथ ही, शेष राशि के लिए कम ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा इसे और अधिक सुलभ बना रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस योजना का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। डॉ. साहू की यह कहानी यह संदेश देती है कि सही जानकारी और समय पर लिया गया निर्णय न केवल आर्थिक बचत दिला सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। सौर ऊर्जा अपनाकर आज की बचत, कल का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा