पीयूष दीवान के एमबीबीएस में चयन से क्षेत्र में खुशी की लहर
दूरस्थ आदिवासी अंचल के सामान्य किसान परिवार से निकलकर हासिल की सफलता, कोरबा मेडिकल कालेज में मिला प्रवेश
धमतरी, 04 सितंबर (हि.स.)। प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसे धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे धमतरी जिले के दूरस्थ ग्राम नारधा के होनहार छात्र पीयूष दीवान ने साबित कर दिखाया है। ईश्वर चंद दीवान के पुत्र पीयूष ने सामान्य आदिवासी किसान परिवार से निकलकर अभावों के बीच देश की कठिन परीक्षा नीट 2026 में सफलता हासिल करते हुए एमबीबीएस में चयन प्राप्त किया है।
उनका चयन बिसाहू दास महंत शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कोरबा में हुआ है। नारधा जैसे दूरस्थ गांव से एमबीबीएस तक का सफर तय करने वाले पीयूष अपने गांव के पहले एमबीबीएस छात्र बन गए हैं। पीयूष के पिता ईश्वर चंद दीवान शिक्षक हैं। गांव में कोचिंग, लाइब्रेरी और बेहतर इंटरनेट जैसी सुविधाओं के अभाव के बावजूद पीयूष ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा रेनबो स्कूल मेघा से प्राप्त की, जबकि मिडिल की पढ़ाई एमजीएम हायर सेकेंडरी स्कूल रायपुर से पूरी की। इसके बाद हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई जीव विज्ञान संकाय से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
12वीं के बाद डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने के लिए वे रायपुर में रहकर नीट की तैयारी में जुट गए। सीमित संसाधनों के बीच तैयारी के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सिहावा विधानसभा क्षेत्र के ऐसे दूरस्थ गांव, जहां कई बच्चे 10वीं-12वीं के बाद आगे की पढ़ाई छोड़ देते हैं, वहां से पीयूष का एमबीबीएस में चयन पूरे अंचल के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। पीयूष ने कहा कि डाक्टर बनने के बाद वह अपने क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहते हैं, क्योंकि आज भी इलाज के लिए ग्रामीणों को करीब 50 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पीयूष की सफलता की खबर से पूरे नारधा गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीण विकास समिति नारधा, आदिवासी समाज, ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों, जनपद पंचायत के पदाधिकारियों, शिक्षकगण और क्षेत्रवासियों ने पीयूष को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा