ई-20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानी सामने आई, आआपा के छत्तीसगढ़ टाउनहॉल में लोगों ने साझा किए अनुभव

 




रायपुर 17 अगस्त (हि.स.)। आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ द्वारा ई-20 पेट्रोल के खिलाफ सोमवार को महाराजा अग्रसेन कॉलेज, समता कॉलोनी, रायपुर में छत्तीसगढ़ टाउनहॉल कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में पार्टी के प्रदेश प्रभारी, दिल्ली सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वर्तमान विधायक मुकेश अहलावत के सानिध्य में ई-20 पेट्रोल से जुड़ी समस्याओं से प्रभावित उपभोक्ताओं, वाहन मालिकों, ट्रैवल्स संचालकों और मैकेनिकों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में अहलावत सहित मुख्य अतिथि डॉ. प्रेमराज देबता एवं अतुल अग्रवाल ने ई-20पेट्रोल से सामने आ रही समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी।

आआपा प्रदेश प्रभारी मुकेश अहलावत ने कहा कि सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर बेचने का फैसला आम जनता को धोखे में रखकर किया है। आम लोगों को यह पता ही नहीं है कि पेट्रोल पंप से जो पेट्रोल वे डलवा रहे हैं, उसमें कुछ चीजों की मिलावट की गई। जब उसका वाहन खराब होता है और जब वह मैकेनिकों के पास जाता है, तब उन्हें मैकेनिकों के माध्यम से मिलावट का पता चलता है। उन्होंने कहा कि ऐसी धोखेबाज सरकार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।

डॉ. प्रेमराज देबता ने बताया कि उन्होंने जून 2024 में नेक्सा डीलरशिप से मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड खरीदी थी। आआपा पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद वाहन के इंजन में बार-बार तकनीकी खराबी और मिसफायरिंग की समस्या सामने आई।

उन्होंने बताया कि इस मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए मारुति सुजुकी और संबंधित डीलर को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई आआपा-संगत कार उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। यदि नई कार उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो लगभग 20,50,494 रुपये की पूरी वाहन कीमत वापस करने के साथ मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपओ तथा मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया है।

डॉ. देबता ने कहा कि जब बाजार में मुख्य रूप से आआपा पेट्रोल ही उपलब्ध है, तब उपभोक्ता को इसके इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह फैसला उन हजारों वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो ई-20 पेट्रोल के कारण अपने वाहनों को लेकर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ने कहा कि सरकार को ई-20 पेट्रोल को लेकर केवल लक्ष्य और आंकड़ों की बात करने के बजाय आम उपभोक्ताओं की जेब, वाहनों की सुरक्षा और ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ रहे प्रभाव का भी गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।

पार्टी ने मांग की कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों में आने वाली समस्याओं पर स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए और वाहन मालिकों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।

आआपा ने कहा कि रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला यह सवाल खड़ा करता है कि यदि ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन खराब होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो सरकार और वाहन निर्माता कंपनियां उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रही हैं।

आम आदमी पार्टी ने कहा कि ई-20 का मुद्दा केवल पेट्रोल का नहीं, बल्कि करोड़ों वाहन मालिकों की जेब और उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा मुद्दा है। पार्टी इस विषय को जनता के बीच लगातार उठाती रहेगी और उपभोक्ताओं के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र प्रसाद पटेल