नवरात्रि पर माता काली के दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु
सोरिद के काली मंदिर में प्रज्वलित हुईं 65 मनोकामना ज्योति कलश
धमतरी, 16 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के सोरिद क्षेत्र स्थित काली मंदिर में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ 65 मनोकामना ज्योति कलश की विधिवत स्थापना की गई है। ज्योति कलश प्रज्वलित होने के साथ ही मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया है। सुबह से ही माता काली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हाे जाती है। भक्त माता के दरबार में मत्था टेककर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां काली की आराधना से कष्टों का निवारण होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ज्योति कलश स्थापित कराते हैं। मंदिर के संरक्षक देवेश सोनी, चिराग सोनी और सागर सोनी ने बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी नवरात्रि को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में स्वच्छता और पेयजल की व्यवस्था की गई है। मां काली की महिमा और धार्मिक मान्यता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चंड-मुंड राक्षसों के वध के बाद भी जब रक्तबीज का आतंक समाप्त नहीं हुआ, तब माता दुर्गा ने काली का रौद्र रूप धारण किया। रक्तबीज को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरने से उसके समान नया राक्षस उत्पन्न हो जाता था। ऐसी स्थिति में मां काली ने उसके रक्त को धरती पर गिरने से रोकते हुए उसका संहार किया। इसके बाद भी माता का क्रोध शांत नहीं हुआ और वे तांडव करने लगीं।
मान्यता है कि सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव उनके मार्ग में लेट गए। जब माता का पैर शिव पर पड़ा, तो उन्हें अपनी स्थिति का बोध हुआ और उनका क्रोध शांत हो गया। धार्मिक मान्यताओं में मां काली का स्वरूप अज्ञान, अहंकार और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। वे समय, मृत्यु और परिवर्तन की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजित हैं। उनका स्वरूप भले ही रौद्र हो, लेकिन भक्तों के लिए वे करुणामयी मां हैं, जो भय दूर कर साहस और शक्ति प्रदान करती हैं। नवरात्रि के दौरान सोरिद स्थित काली मंदिर में प्रज्वलित मनोकामना ज्योति कलश श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक बने हुए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा