आजादी के उत्सव के बीच डिजिटल बदलाव की दस्तक, एग्रीस्टैक से जुड़ रहे जिले के किसान

 


बलरामपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। देशभर में आजादी के उत्सव की तैयारियों के बीच बलरामपुर जिले के गांवों में भी डिजिटल बदलाव की तस्वीर दिखाई दे रही है। गांव-गांव तिरंगा अभियान और स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच किसान एग्रीस्टैक जैसी डिजिटल कृषि व्यवस्था से जुड़ रहे हैं। खास बात यह है कि किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन के लिए अलग से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। उचित मूल्य की दुकानों में राशन वितरण के साथ ही एग्रीस्टैक पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

एग्रीस्टैक पंजीयन किसानों के लिए महज एक डिजिटल प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कृषि से जुड़ी विभिन्न सेवाओं तक आसान पहुंच बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पंजीयन के माध्यम से किसानों की कृषि संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होगी। इससे धान खरीद, खाद-बीज सहित कृषि संबंधी सुविधाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे में किसानों और उनकी फसलों से संबंधित जानकारी दर्ज करने में भी एग्रीस्टैक की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

मंगरहारा के किसान भीन ने उचित मूल्य की दुकान पर अपना एग्रीस्टैक पंजीयन कराया। उन्होंने बताया कि गांव में ही पंजीयन की सुविधा मिलने से उन्हें काफी सहूलियत हुई। धान खरीद, खाद-बीज लेने और फसल से जुड़ी डिजिटल जानकारी दर्ज कराने जैसी प्रक्रियाओं में आगे इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

उचित मूल्य की दुकान पर राशन लेने पहुंचे अन्य किसानों को भी एग्रीस्टैक पंजीयन के महत्व की जानकारी दी गई। दुकान में ही पंजीयन की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को इसके लिए अलग से किसी कार्यालय में जाने की जरूरत नहीं पड़ी। राशन लेने के साथ ही उनका आवश्यक डिजिटल पंजीयन भी पूरा हो गया।

नंदू कुशवाह ने कहा कि एक ही जगह चावल भी मिल गया और एग्रीस्टैक का पंजीयन भी हो गया। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हुई है। गांव में इस तरह की सुविधा मिलने से किसानों के लिए डिजिटल व्यवस्था से जुड़ना आसान हो रहा है।

पीडीएस दुकानों के माध्यम से एग्रीस्टैक पंजीयन की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कृषि व्यवस्था को गति मिल रही है। रोजमर्रा की जरूरत से जुड़े केंद्र अब किसानों को कृषि से संबंधित डिजिटल सेवाओं से जोड़ने का माध्यम भी बन रहे हैं।

आजादी के उत्सव के बीच गांवों तक पहुंच रही यह डिजिटल सुविधा बदलते ग्रामीण भारत की तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। तिरंगा जहां स्वतंत्रता, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, वहीं एग्रीस्टैक पंजीयन किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बढ़ता कदम है। तकनीक अब शहरों तक सीमित न रहकर गांव और किसान तक पहुंच रही है, जिससे जिले के किसान बदलती कृषि व्यवस्था के साथ डिजिटल भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय