पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते फसल गिरदावरी का काम प्रभावित
रायपुर, 24 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की 13 अक्टूबर से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण फसल गिरदावरी (डिजिटल क्रॉप सर्वे) और अन्य राजस्व कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं।
भू-अभिलेख संचालक और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पटवारी संघ की बैठकें अब तक बेनतीजा रही हैं, जिसके कारण गतिरोध लगातार जारी है। प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने धान खरीद से पहले चल रहे इस आंदोलन पर कड़ा रुख अपनाते हुए डिजिटल सर्वे को जरूरी बताया है और पटवारियों से काम पर लौटने की अपील की है।
मंत्री ने कहा कि धान खरीद शुरू होने से पहले खेतों में फसल का सत्यापन और गिरदावरी करना बेहद महत्वपूर्ण है। इस सरकारी कामकाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की अनिवार्यता का बचाव करते हुए कहा कि धान खरीद में पारदर्शिता लाने और बाहर (अन्य राज्यों) से आने वाले अवैध धान व बिचौलियों की गड़बड़ी को रोकने के लिए डिजिटल सर्वे बेहद जरूरी है।
वहीं छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप का कहना है कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के ऐप को आनन-फानन में लागू कर दिया गया है जिससे व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं, इसलिए मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी
उल्लेखनीय है कि पीवी ऐप ( फसल भौतिक सत्यापन ऐप) में आ रही तकनीकी व व्यावहारिक समस्याओं, दंडात्मक कार्रवाई (निलंबन और स्थानांतरण), वेतन विसंगति और पदोन्नति की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इस ऐप के तहत पटवारियों को खेत के चारों कोनों पर जाकर जीपीएस लोकेशन के साथ फसल की 4 तस्वीरें और खुद की फोटो अपलोड करनी पड़ रही है। बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण और पुराने/त्रुटिपूर्ण डिजिटल नक्शों के कारण इस तरीके से काम करना नामुमकिन बताया जा रहा है। ऐप का विरोध करने पर महासमुंद, बलौदाबाजार और अन्य जिलों में पटवारियों के खिलाफ किए गए निलंबन, कारण बताओ नोटिस और तबादलों की कार्रवाई से पटवारी संघ काफी आक्रोशित है।
इस बीच तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को खेतों में पहुंचकर पीव्ही ऐप के जरिए फसल सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर तहसीलदार संघ ने आपत्ति जताई है।
जमीनों की रजिस्ट्री के बाद होने वाला नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, बी1 खसरा और नक्शा दुरुस्ती जैसे सभी काम पूरी तरह से रुक गए हैं।संघ ने 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अधिकारियों को अनिवार्य मैदानी सर्वेक्षण से छूट देने और डिजिटल फसल सर्वेक्षण में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने की मांग की है।
संघ का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अधिकारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने से नियमित राजस्व कार्यों पर असर पड़ सकता है। वहीं, डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत बड़ी संख्या में खसरों की प्रविष्टियां अभी पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में तय समय-सीमा के भीतर फसल गिरदावरी पूरी कराना प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
तहसीलदार संघ की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में डिजिटल क्रॉप सर्वे और पीव्हीऐप के जरिए किए जा रहे फसल सर्वेक्षण की प्रगति का ब्योरा दिया गया है। पत्र में उल्लेखित आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल 32,15,837 खसरों में से 8,48,504 की प्रविष्टियां पूरी हो चुकी हैं। वहीं, 23,67,333 खसरों का सर्वेक्षण दर्ज किया जाना बाकी है।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा