(अपडेट) 10 माह पहले उठी मांग पर खुले पण्डो समाज के तीन छात्रावास, समाज ने कृषि मंत्री को सौंपा आभार पत्र
बलरामपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो समाज के बच्चों के लिए रामानुजगंज और डिण्डो में तीन प्री-मैट्रिक छात्रावास शुरू होने पर समाज के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को कृषि मंत्री रामविचार नेताम के प्रति आभार जताया। रामानुजगंज के पंडित दीनदयाल उपाध्याय मांगलिक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पण्डो जनजाति समाज कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें आभार पत्र सौंपा। समाज ने कहा कि करीब 10 माह पहले रखी गई मांगों पर कार्रवाई होने से बच्चों की शिक्षा और समाज के विकास को नई दिशा मिलेगी।
कृषि मंत्री ने रामानुजगंज में पण्डो बालक और बालिका छात्रावास तथा डिण्डो में पण्डो बालक छात्रावास का शुभारंभ किया। समाज की ओर से सौंपे गए पत्र के अनुसार, लगभग 10 माह पहले प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री से मुलाकात कर बच्चों के लिए छात्रावास, सामाजिक भवन और जाति सुधार से जुड़ी मांगें रखी थीं। इसके बाद तीनों छात्रावासों को स्वीकृति मिली। महादेवपुर-खुटरा में सामाजिक भवन का निर्माण कराने के साथ समतलीकरण, ट्यूबवेल और बिजली व्यवस्था का काम भी पूरा किया गया। वहीं, जाति सुधार की मांग पर 27 अप्रैल 2026 को टीआरआई विभाग से प्रतिवेदन तैयार कराकर शासन के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
आभार पत्र में समाज ने कहा कि इन प्रयासों से केवल भवनों का निर्माण नहीं हुआ है, बल्कि पण्डो जनजाति की भावी पीढ़ी के लिए शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर भी तैयार हुए हैं। समाज ने कृषि मंत्री को ‘जन-दुलरुवा, पाल के लाल’ संबोधित करते हुए उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
आभार पत्र स्वीकार करते हुए रामविचार नेताम ने कहा कि पण्डो समाज का स्नेह और विश्वास उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। बच्चों के भविष्य और समाज के विकास के लिए उठाई गई मांगों को पूरा करना उनका दायित्व था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पण्डो समाज के उत्थान के लिए आगे भी हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
कृषि मंत्री ने कहा कि छात्रावासों से पण्डो समाज के बच्चों, विशेषकर बेटियों को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलेंगे। शिक्षा प्राप्त कर यही बच्चे भविष्य में समाज का नेतृत्व कर सकेंगे। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से स्कूल और छात्रावास भेजने की अपील की। साथ ही शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने और आजीविका के साधनों को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से संपन्न बनने के साथ अपनी भाषा, परंपरा और संस्कृति को संरक्षित रखना भी जरूरी है, क्योंकि यही समाज की पहचान है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय