उपस्थिति दर्ज करने में व्यावहारिक दिक्कतें,व्यावहारिक और लचीला बनाने की मांग की

 




रायगढ़, 09 अक्टूबर (हि.स.)।ग्राम पंचायत सचिवों की उपस्थिति आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से दर्ज किए जाने की व्यवस्था को लेकर मैदानी स्तर पर व्यावहारिक कठिनाइयों का मुद्दा सामने आया है। पंचायत सचिवों ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन देकर इस व्यवस्था को उनकी कार्यप्रणाली के अनुरूप व्यावहारिक और लचीला बनाने की मांग की है।

सचिवों का कहना है कि उनके कार्यों की प्रकृति केवल पंचायत भवन में निर्धारित समय पर उपस्थित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय कार्यों के लिए लगातार मैदानी दौरे भी करने पड़ते हैं।

जिला पंचायत सीईओ को दिए गए आवेदन में पंचायत सचिवों ने बताया है कि उन्हें शासकीय कार्यों के सिलसिले में जनपद पंचायत, जिला पंचायत, तहसील, बैंक और अन्य विभागीय कार्यालयों में जाना पड़ता है। इसके अलावा शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, हितग्राहियों से संपर्क, निरीक्षण और अन्य मैदानी गतिविधियों के लिए ग्रामों में पहुंचना भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

सचिवों के अनुसार, कई बार हितग्राहियों की उपलब्धता और शासकीय कार्यों की आवश्यकता के आधार पर समय निर्धारित करना पड़ता है। ऐसे में केवल पंचायत भवन में निश्चित समय पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने को ही कार्यस्थल पर मौजूदगी का आधार बनाना व्यावहारिक कठिनाई पैदा कर सकता है।

आवेदन में दूरस्थ ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया है। सचिवों का कहना है कि नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने या तकनीकी दिक्कतों के कारण उपस्थिति दर्ज करना कई बार संभव नहीं हो पाता। ऐसी परिस्थितियों में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं होने को कर्मचारी की अनुपस्थिति मानने से वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड के बीच अंतर उत्पन्न हो सकता है।

पंचायत सचिवों ने यह भी कहा है कि आकस्मिक निरीक्षण, विभागीय बैठक और उच्चाधिकारियों द्वारा तत्काल सौंपे गए कार्यों के दौरान उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था कठिनाई पैदा कर सकती है। यदि केवल आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के रिकॉर्ड के आधार पर कर्मचारी की उपस्थिति निर्धारित की जाती है, तो शासकीय कार्यों के लिए बाहर जाने वाले कर्मचारियों की वास्तविक कार्यस्थिति का सही आकलन करना मुश्किल हो सकता है।

पंचायत सचिवों ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि वे डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था के उद्देश्य का सम्मान करते हैं। उनकी मांग है कि उपस्थिति प्रणाली में अधिकृत शासकीय कार्य, मैदानी ड्यूटी और तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रावधान किए जाएं, ताकि उपस्थिति में पारदर्शिता बनी रहे और शासकीय योजनाओं का मैदानी क्रियान्वयन भी प्रभावित न हो।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए बाध्य किया जाता है, तो सचिव केवल शासकीय कार्य दिवस एवं निर्धारित समय में ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। उन्होंने जिला पंचायत सीईओ से पूरे मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने और उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

आज जहाँ शहरी क्षेत्रों में भी नेटवर्क की समस्या आम है, उपभोक्ता घरों, कार्यालयों के अंदर के अलावा कई स्थानों पर नेटवर्क की समस्या होने की शिकायत करते हैं, बिना वाई फाई, एयर फाईबर डिवाइस के कार्य संभव नहीं हो पा रहा है। वहीं पंचायत सचिवों पर इस प्रकार की व्यवस्था थोपना कहां तक जायज है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंचायत सचिवों द्वारा उठाई गई इन व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए जिला पंचायत स्तर पर क्या व्यवस्था बनाई जाती है, ताकि डिजिटल निगरानी और मैदानी कार्यों के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान