कोरबा : धान बिक्री संकट से टूटे आदिवासी किसान, 24 घंटे में दो ने किया जहर सेवन का प्रयास

 


कोरबा, 13 जनवरी (हि.स.)। कोरबा जिले में धान बिक्री को लेकर उत्पन्न संकट ने आदिवासी किसानों को इस कदर तोड़ दिया है कि बीते 24 घंटे के भीतर दो किसानों ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया। पहले समर सिंह गौड़ और उसके बाद वैशाखू मरकाम ने कीटनाशक खाकर जान देने की कोशिश की। दोनों ही किसान अपने खेत में उत्पादित धान की बिक्री में आ रही समस्याओं से गहरे आहत बताए जा रहे हैं।

किसानों का आरोप है कि धान खरीद व्यवस्था में अव्यवस्था और प्रक्रियागत अड़चनों के कारण उनकी फसल समय पर नहीं बिक पा रही है। आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव के चलते दोनों आदिवासी किसानों ने यह कदम उठाया। गनीमत रही कि समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई।

इन घटनाओं को लेकर जिले की राजनीति भी गरमा गई है। आज मंगलवार को युवा कांग्रेस एवं अन्य कार्यकर्ताओं ने कोरबा कलेक्ट्रेट गेट के सामने अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता अपने शरीर पर सफेद कपड़ा ओढ़कर सड़क पर लेट गए और यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसान किस कदर मजबूरी में “कफन” की कीमत तक जानने को मजबूर हो रहा है।

इस प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कलेक्ट्रेट मार्ग से गुजरने वाले लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ। प्रदर्शन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी होती रहीं। कुछ लोगों का कहना है कि यह कदम किसानों की गंभीर समस्या पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए उठाया गया, वहीं कुछ इसे सुर्खियों में आने का प्रयास भी मान रहे हैं।

फिलहाल धान खरीद को लेकर उठे सवालों और किसानों की बिगड़ती स्थिति ने प्रशासन और सरकार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि यदि समय रहते ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी