धान खरीद में फर्जीवाड़ा रोकने प्रशासन सख्त, दो दिन में संवेदनशील स्थानों पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे और जांच नाके

 


धमतरी, 03 नवंबर (हि.स.)। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान खरीद को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। धान खरीद में फर्जीवाड़ा, अनियमितता, अवैध परिवहन और बिचौलियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने मंगलवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान खरीद शासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही, मिलीभगत या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वास्तविक किसानों से ही धान खरीदी सुनिश्चित करने तथा छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

जिले में इस वर्ष 96 सहकारी समितियों के अंतर्गत 108 धान उपार्जन केंद्रों में खरीद की जाएगी। व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए पांच नवीन सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं तथा आठ नए धान उपार्जन केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। कलेक्टर ने सभी केंद्रों में पर्याप्त कर्मचारियों, हमालों और अन्य जरूरी मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही जहां कर्मचारियों की कमी है, वहां भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा। किसानों की सुविधा के लिए छाया, पेयजल, बैठने और अन्य बुनियादी इंतजाम समय-सीमा में पूरे करने के निर्देश भी दिए। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी से होगी निगरानी: धान के अवैध परिवहन और कोचियों-बिचौलियों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए मुख्य मार्गों, बोरई सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और जांच नाके स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने दो दिनों के भीतर यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से शुरू करने को कहा। सीमावर्ती क्षेत्रों और धान परिवहन के प्रमुख मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। अवैध रूप से धान का परिवहन करते पाए जाने पर संबंधित वाहन और धान जब्त किए जाएंगे। जब्त वाहनों को तीन से चार माह बाद ही नियमानुसार छोड़ने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

किसान पंजीयन की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने ग्राम पंचायतों के माध्यम से पंजीयन का सत्यापन कराने और वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करने को कहा। दूसरे के नाम पर धान बेचने, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उपार्जन का प्रयास करने अथवा पंजीयन में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में सहयोग करने वाले व्यक्तियों की जिम्मेदारी भी तय होगी।

टोकन व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर टोकन जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े और उपार्जन केंद्रों में भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। खरीदी से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं का निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पालन किया जाए।

कलेक्टर मिश्रा ने अधिकारियों को खरीदी अवधि के दौरान नियमित निरीक्षण, सतत निगरानी और प्रभावी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य वास्तविक किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य सहज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से दिलाना है। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा