रोपाई के बाद सड़ रही 1156 धान की फसल, किसान चिंतित
धमतरी, 01 अगस्त (हि.स.)। धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में सोसाइटी से खरीदे गए 1156 किस्म के धान बीज की रोपाई के बाद पौधों के सड़ने और गलने की शिकायत सामने आई है।
ग्राम फरसियां के किसान यशवंत साहू ने बताया कि उन्होंने सोसाइटी से 1156 किस्म का 60 किलो धान बीज खरीदकर एक एकड़ खेत में रोपाई की थी। वहीं, इसके ठीक बगल में एक एकड़ में दूसरी प्रजाति का धान भी लगाया गया। किसान का कहना है कि दूसरी प्रजाति के धान के पौधे पूरी तरह स्वस्थ हैं और अच्छी तरह बढ़ रहे हैं, जबकि 1156 किस्म के धान के आधे से अधिक पौधे रोपाई के कुछ ही दिनों बाद सड़-गल गए। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है और वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि, शिकायत के बावजूद कृषि विभाग का कोई अधिकारी खेत का निरीक्षण करने नहीं पहुंचा और न ही यह बताया गया कि फसल को बचाने के लिए कौन-सी दवा या खाद का उपयोग किया जाए। समय पर तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिलने से उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। यदि जल्द समाधान नहीं मिला तो पूरी फसल खराब होने का खतरा है।
गौरतलब है कि धमतरी जिला प्रदेश के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, जहां हर वर्ष बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है। इसी कारण कई निजी कंपनियां अपने बीज किसानों तक पहुंचाती हैं और प्रचार-प्रसार के लिए डेमो के रूप में निशुल्क बीज भी वितरित करती हैं। किसानों का कहना है कि बीजों की गुणवत्ता की प्रभावी और व्यावहारिक जांच नहीं होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। इससे पहले भी संदिग्ध गुणवत्ता वाले बीजों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिनका सीधा असर किसानों की उपज और आय पर पड़ा है। उन्होंने प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित खेतों का तत्काल निरीक्षण कर बीजों की जांच कराने, नुकसान का आकलन करने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसान गुलजार कश्यप का कहना है कि, यदि सोसाइटियों में वितरित होने वाले बीजों की नियमित गुणवत्ता जांच और निगरानी सुनिश्चित की जाए तो ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। बिसाहू राम देवांगन ने कहा कि दिनों दिन किसी लागत बढ़ती जा रही है ऐसे में यदि धान बीज ही खराब निकल जाए तो काफी नुकसान होता है।।कृषि विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए। लोमस नेताम का कहना है कि कृषि क्षेत्र में तमाम कृषि उपकरण आ जाने के बाद कार्य आसान तो हुआ है लेकिन इसके साथ ही साथ खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है, जिससे यदि समय पर उत्पादन न हो तो घाटा तय रहता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा