धमतरी : पांच व छह फरवरी को जिले के 15 सौ किसान बेचेंगे समर्थन मूल्य में अपना धान
कई किसानों को अव्यवस्था के कारण नहीं मिलेगा धान बेचने का मौका
धमतरी, 04 फ़रवरी (हि.स.)। समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह गए किसानों के लिए राज्य शासन के आदेशानुसार पांच एवं छह फरवरी को पुन: धान की खरीदी की जाएगी, इसके लिए केन्द्रों में तैयारी पूरी हो गई है। जिला नोडल अधिकारी कार्यालय के अनुसार दो दिनों में 15 किसानों से 70 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। धान खरीदी के लिए शासन के कुछ नियम व शर्ते है, इसके चलते कई किसानों को फिर धान खरीदी से वंचित हाेना पड़ेगा।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के अंतिम दिनों तक जिले के सैकड़ों किसानों को कई अव्यवस्था व परेशानियों के चलते धान बेचने का मौका ही नहीं मिला। ऐसे पीड़ित किसान अपना उत्पादन बेचने के लिए खरीदी के अंतिम दिन से अभी तक लगातार आंदोलन व प्रदर्शन कर रहे थे।
धमतरी ब्लाक के डुबान क्षेत्र के धान खरीदी केन्द्र माटेगहन में तो धान खरीदने की मांग को लेकर जमकर हड़ताल व प्रदर्शन किया गया। चहूंओर से जिले व प्रदेश के कई केन्द्रों में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने पांच व छह फरवरी को पुन: धान बेचने से वंचित किसानों के धान की खरीदी करने की घोषणा कर आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत पांच फरवरी से छह फरवरी तक छूटे हुए किसानों के धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर किया जाएगा। खरीदी के लिए केन्द्रों में हमालों और बारदाना की तैयारी हो गई है।
इस संबंध में जिला नोडल अधिकारी बीपी गोस्वामी ने बताया कि, दो दिनों के धान खरीदी के लिए चार फरवरी को देर शाम तक 1500 किसानों के धान खरीदने के लिए सूची मिली है। इन किसानों से कुल 70 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। वहीं धान खरीदी के लिए शासन के कुछ नियमावली भी है, ऐसे में किसानों की संख्या बढ़ने की संभावना है।नियमावली के तहत ऐसे किसान जिनके द्वारा 10 जनवरी 2026 पश्चात टोकन के लिए आवेदन किया गया था परंतु सत्यापन नहीं हो पाया। वहीं सत्यापन उपरांत धान पाया गया है। इसके अलावा 28, 29 और 30 जनवरी को टोकन प्राप्त किया गया था परंतु किसी कारणवश धान का विक्रय नहीं हो पाया है, ऐसे किसानों का धान खरीदा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि चार फरवरी को टोकन कटाने के लिए एप भी नहीं खुल पाया था, ऐसे में किसानों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं जिन किसानों का मैनुअल राजस्व अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन किया जा चुका है, लेकिन आनलाइन नहीं चढ़ाया गया है, ऐसे किसानों को धान बेचने दिक्कतें होगी। शासन के नियमावली में अब भी कई किसान खरा नहीं उतरेंगे और धान बेचने से वंचित रह जाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा