एमसीबी: पशु चिकित्सकों ने जटिल ऑपरेशन कर नवजात बछड़े को दी नई जिंदगी
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां गांव में पशु चिकित्सा सेवाओं ने संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। गांव के पशुपालक राजकमल की मादा गाय के प्रसव के दौरान नवजात बछड़ा डिस्टोकिया जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा था, जिसमें बछड़ा गर्भ में फंस जाने से मां और बच्चे दोनों की जान पर खतरा बन जाता है। स्थिति अत्यंत नाजुक होने पर तत्काल एमवीयू 1962 की टीम को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही डॉ. विनोद सिंह और डॉ. बी. के. तांजे अपनी टीम के साथ रात करीब 8 बजे मौके पर पहुंचे। उनके साथ पैरावेट उपासना यादव और पंकज भी मौजूद रहे। सीमित संसाधनों और कठिन हालात के बावजूद चिकित्सकों ने बिना देरी किए जटिल शल्य चिकित्सा का निर्णय लिया। पूरी सावधानी, आत्मविश्वास और विशेषज्ञता के साथ ऑपरेशन किया गया, जिसमें काफी मशक्कत के बाद नवजात बछड़े की जान बचाने में सफलता मिली।
ऑपरेशन के बाद बछड़े की हालत अब स्थिर बताई जा रही है और उसमें लगातार सुधार हो रहा है, वहीं मादा गाय भी पूरी तरह सुरक्षित है। इस सफल प्रयास से पशुपालक परिवार ने राहत की सांस ली। पशुपालक राजकमल ने डॉ. विनोद सिंह, डॉ. बी. के. तांजे और पूरी MVU 1962 टीम की तत्परता, मेहनत और मानवीय सेवा भावना की खुले दिल से सराहना करते हुए कहा कि समय पर चिकित्सकीय मदद नहीं मिलती तो बड़ा नुकसान हो सकता था।
यह घटना न सिर्फ पशु चिकित्सकों की कुशलता को रेखांकित करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित MVU 1962 जैसी मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं की अहम भूमिका को भी उजागर करती है, जो संकट के समय पशुपालकों के लिए संजीवनी बनकर पशुधन संरक्षण में मजबूत भरोसा कायम कर रही हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह