गंगरेल के द्वीप पर बसा रोमांच का नया संसार, पहली बार शुरू हुआ आइलैंड कैंपसाइट
धमतरी, 22 सितंबर (हि.स.)। गंगरेल बांध के विशाल जलक्षेत्र के बीच स्थित द्वीप पर पहली बार आइलैंड कैंपसाइट की शुरुआत के साथ धमतरी में पर्यटन का नया अध्याय शुरू हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य, जल पर्यटन, रोमांचक गतिविधियों और स्थानीय संस्कृति के समन्वय से तैयार यह अनुभव एडवेंचर, नेचर और कम्युनिटी टूरिज्म की संभावनाओं को नई दिशा दे रहा है।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में गंगरेल क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के प्रयासों के तहत 17 और 18 सितंबर को टूर ऑपरेटर्स के लिए एफएएम ट्रिप आयोजित की गई। इसमें विभिन्न टूर ऑपरेटर्स ने गंगरेल बांध, जलक्षेत्र, द्वीपों तथा आसपास के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। इसका उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को धमतरी में विकसित हो रहे नए पर्यटन अनुभवों और संभावनाओं से परिचित कराना था। इसी क्रम में 19 और 20 सितंबर को छत्तीसगढ़ की ट्रैवल कंपनी कैंप वंश ने गंगरेल के द्वीप पर 2 दिन एक रात कैम्पिंग आयोजित किया। इसमें छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और तमिलनाडु से पहुंचे कुल 12 पर्यटकों ने हिस्सा लिया। करीब 40 मिनट की रोमांचक बोट यात्रा के बाद पर्यटक द्वीप पर पहुंचे। जल के बीच नाव से द्वीप तक पहुंचने का अनुभव ही इस यात्रा का पहला रोमांच रहा। द्वीप पर पर्यटकों ने शांत प्राकृतिक वातावरण, जैव विविधता और खुले आसमान के बीच प्रकृति का आनंद लिया। कैंपिंग के दौरान नाइट कैंपिंग, ट्रेकिंग, फिशिंग, स्विमिंग, बोनफायर, आउटडोर कुकिंग, बर्ड वॉचिंग और स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। खुले प्राकृतिक वातावरण में कैंप लगाकर रात बिताना और तारों से भरे आकाश को निहारना पर्यटकों के लिए खास अनुभव रहा।
शांत जलक्षेत्र के बीच रात में कैंपिंग और खुले आसमान के नीचे बोनफायर ने यात्रा को यादगार बनाया। ओडिशा और तमिलनाडु से आए पर्यटकों ने गंगरेल के प्राकृतिक सौंदर्य और यहां विकसित हो रहे एडवेंचर टूरिज्म को लेकर रुचि जताई। आइलैंड कैंपिंग का महत्व पर्यटकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं और समुदाय के लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। बोटिंग, स्थानीय गाइड, कैंप प्रबंधन, भोजन व्यवस्था, आतिथ्य, ट्रेकिंग और अन्य पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी से आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। पर्यटकों को स्थानीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं से परिचित होने का अवसर भी मिलेगा। गंगरेल में विकसित हो रहा यह मॉडल जिम्मेदार और प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
पर्यटन गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जैव विविधता की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया जाना आवश्यक है। गंगरेल के जलाशय, द्वीपों, प्राकृतिक परिदृश्य और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को जोड़कर नए अनुभव विकसित किए जा सकते हैं। आइलैंड कैंपसाइट की शुरुआत धमतरी में अनुभव आधारित पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने वाली पहल है। इससे गंगरेल को देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के लिए नए आकर्षण के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। गंगरेल अब केवल जलाशय के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति, रोमांच और स्थानीय जीवन के संगम के रूप में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आइलैंड कैंपिंग की शुरुआत पर्यटन क्षेत्र के साथ स्थानीय युवाओं और समुदायों के लिए पर्यटन आधारित आजीविका के नए द्वार खोलने की संभावना भी प्रस्तुत करती है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा