नक्सली डंप से मिले 20 लाख नगद राशि काे दो डीएसपी ने आपस में बांट लिया
कांकेर, 28 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सली डंप की तलाश के दौरान मार्च-अप्रैल 2026 में आत्मसमर्पित नक्सलियाें के निशानदेही पर जंगल से बरामद 20 लाख रुपये की नकद रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय तत्कालीन दो डीएसपी ने आपस में बांट लिया। मामला कांकेर पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के संज्ञान में आने के बाद शिकायत के आधार पर जांच करवाई।
कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने शिकायत मिलने और जांच कराए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि तत्कालीन अधिकारियाें के कांकेर जिले से स्थानांतरण के बाद नक्सली डंप से बरामद नगद राशि सरकारी खाते में जमा नहीं कराने की बात समने आई।जिसके बाद उस दाैरान तलाशी अभियान में शामिल पुलिस की टीम एवं आत्मसमर्पित नक्सलियाें के बयान दर्ज कर जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय के उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कांकेर में पदस्थ तत्कालीन दो डीएसपी अपनी टीम के साथ विकासखंड कांकेर के ग्राम पंचायत मूरागांव के आश्रित ग्राम टोण्डामरका और मरकाकोनारी के जंगलों में नक्सली डंप की तलाश के लिए अभियान पर गए थे। बताया गया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिले इनपुट के आधार पर जंगल में संभावित डंप की तलाश की जा रही थी। लगे आरोपों के अनुसार तलाशी अभियान के दौरान टोण्डामरका के जंगल से लगभग 15 लाख रुपये और मरकाकोनारी के जंगल से लगभग 05 लाख रुपये नकद नक्सली डंप से मिले। इस तरह कुल बरामद रकम लगभग 20 लाख रुपये बताई जा रही है। हालांकि नकदी की वास्तविक बरामदगी और उसके कथित बंटवारे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। आरोप है कि नक्सली डंप से बरामद रकम की जानकारी उच्च अधिकारियों को नियमानुसार नहीं दी गई और दोनों तत्कालीन अधिकारियों ने इसे आपस में बांट लिया।
जांच के निष्कर्ष और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ किसी संभावित कार्रवाई को लेकर फिलहाल आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि जांच में कथित नकदी बरामदगी और उसके बंटवारे से जुड़े आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आए। बताया जा रहा है कि दोनों तत्कालीन डीएसपी के कांकेर जिले से स्थानांतरण के बाद नक्सली डंप की तलाश में सक्रिय टीम के बीच कथित बरामदगी को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। इसके बाद मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा और मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर इसकी जांच के आदेश दिए गये थे। हालांकि इस आरोप की पुष्टि जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट रूप से हो सकेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे