इंद्रावती नेशनल पार्क में नक्सलवाद के खात्मे के बाद प्रशासन की पहुंच व विकास पर जोर

 




बीजापुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। बीजापुर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का एक बड़ा अध्याय इंद्रावती नेशनल पार्क के दुर्गम जंगलों में लिखा गया। कभी नक्सली संगठन के मजबूत ठिकाने के रूप में पहचाने जाने वाले इस इलाके में अब नक्सलवाद के खात्मे के बाद प्रशासन की पहुंच और विकास की राह खोलने पर जोर दिया जा रहा है।

घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और सीमित आवागमन लंबे समय तक सुरक्षाबलों के साथ-साथ प्रशासन के लिए भी चुनौती बने रहे। लगभग 2,500 वर्ग किलोमीटर में फैला इंद्रावती नेशनल पार्क जैव विविधता और वन्यजीवों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस विस्तृत वन क्षेत्र में आने वाली चार पंचायतों तक बुनियादी सेवाओं की पहुंच बड़ी चुनौती रही है।

बीजापुर उमेश गुप्ता के अनुसार, इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाना प्राथमिकता है, ताकि प्रशासन अंदरूनी इलाकों तक पहुंचकर काम कर सके और ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतें पूरी की जा सकें। सड़क संपर्क बेहतर होने से सरकारी सेवाओं को दूरस्थ गांवों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। एसपी ने बताया कि क्षेत्र में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित हैं। उद्देश्य केवल पहुंच मजबूत करने के साथ उन इलाकों में प्रशासनिक गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है, जहां पहले पहुंचना कठिन था।

इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में पिल्लूर में थाना खोलने की तैयारी भी महत्वपूर्ण कदम है। एसपी के मुताबिक, पिल्लूर में थाना खोलने की स्वीकृति मिल चुकी है और इसे जल्द शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। थाना खुलने से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था संबंधी जरूरतों के साथ ग्रामीणों की शिकायतों और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था मजबूत हो सकती है। इससे प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संपर्क बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

09 फरवरी 2025 को मद्देड़-फरसेगढ़ सीमा क्षेत्र के जंगल-पहाड़ी इलाके में डीआरजी, एसटीएफ और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त कार्रवाई में 31 माओवादी मारे गए थे। 5 मई 2025 को नेशनल पार्क क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में सात माओवादियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई। वहीं, 11 नवंबर 2025 को संयुक्त अभियान के दौरान छह माओवादियों के शव और हथियार, 17 जनवरी 2026 को नेशनल पार्क क्षेत्र में हुई कार्रवाई में डीवीसीएम दिलीप बेड़जा समेत छह माओवादियों के मारे गए थे।लगातार चलाए गए अभियानों ने इस दुर्गम इलाके में सुरक्षा बलों की चुनौती और रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। कनेक्टिविटी पहली प्राथमिकता, ताकि प्रशासन गांवों तक पहुंच सके।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे