पीएम आवास सूची से जरूरतमंदों का नाम गायब, ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में बोला हल्ला
संपन्न लोगों को मिल रहा योजना का लाभ, जरूरतमंदाें का नाम गायब
धमतरी, 25 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवास प्लस 2.0 की स्थायी प्रतीक्षा सूची में नाम नहीं मिलने से नाराज ग्राम परसतराई और पुरी के ग्रामीण गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि आवास सर्वे में पात्र होने और सूची में नाम शामिल होने के बावजूद अंतिम सूची से उनके नाम हटा दिए गए हैं, जिससे वे प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हो गए हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर पुनः सर्वे कराने और पात्र हितग्राहियों के नाम सूची में जोड़ने की मांग की है।
24 जून को जिले के ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। ग्राम सभाओं में प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थायी प्रतीक्षा सूची का वाचन एवं अनुमोदन, पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों पर चर्चा तथा प्राप्त दावे-आपत्तियों का निराकरण किया गया। इसी दौरान कई ग्रामीणों को पता चला कि आवास सर्वे सूची में नाम होने के बावजूद उनके नाम अंतिम प्रतीक्षा सूची में शामिल नहीं हैं। ग्राम पंचायत परसतराई के वार्ड क्रमांक एक, दो, तीन और आठ के ग्रामीणों ने भी अंतिम सूची से नाम हटाए जाने की शिकायत करते हुए जनपद पंचायत धमतरी एवं कलेक्ट्रेट कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीण टेकेश्वरी साहू, रामेश्वरी, बुधियारिन, यशोदा साहू, प्रियंका एवं ढालूराम ने बताया कि आवास सर्वे सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद अंतिम सूची में 20 से 25 हितग्राहियों के नाम शामिल नहीं किया गया हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आवास योजना के चयन में पारदर्शिता का अभाव है। गांव में कई ऐसे परिवार हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं और पक्के मकानों में निवास कर रहे हैं, फिर भी उन्हें योजना का लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर गरीब, मजदूर और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के नाम सूची से बाहर हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से छूटे हुए हितग्राहियों का पुनः सत्यापन कराने और पात्र पाए जाने पर उनके नाम सूची में शामिल करने की मांग की है।ग्राम पंचायत पुरी के ग्रामीण दिलीप साहू, बुंदेश्वरी साहू, अनिता एवं हेमपुष्पा ने बताया कि आवास सर्वे सूची में कुल 268 हितग्राहियों के नाम शामिल थे, लेकिन जारी स्थायी प्रतीक्षा सूची में केवल 228 हितग्राहियों के नाम ही दर्ज किए गए। इससे 40 हितग्राही सूची से बाहर हो गए। प्रभावित हितग्राहियों ने कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं। इसके बावजूद उन्हें योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नाम हटाने के संबंध में उन्हें कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा