अकीदत से मना मोहर्रम, कर्बला के बलिदानियों को किया याद
चमेली चौक में लंगर-शरबत वितरण, मांगी गई अमन की दुआ
धमतरी, 26 जून (हि.स.)। मोहर्रम का पर्व मुस्लिम समाज ने अकीदत और एहतराम के साथ मनाया। इस मौके पर जामा मस्जिद धमतरी में 10 दिनों तक तकरीर का सिलसिला चला, जिसमें आलिमों ने कर्बला के वाकये को बयान किया। तकरीर में बताया गया कि किस तरह हजरत इमाम हुसैन ने यजीद के जुल्म के आगे न झुकते हुए अपने और 72 साथियों की कुर्बानी देकर इस्लाम और इंसानियत को बचा लिया।
तकरीर के 9वें दिन हजरत सलमान रजा ने खिताब करते हुए फरमाया कि कर्बला की जंग हक और बातिल की जंग थी। एक तरफ हक की राह पर चलने वाले हजरत इमाम हुसैन और उनका काफिला था, तो दूसरी तरफ बुराई और जुल्म का प्रतीक यजीद का पूरा लश्कर था। इमाम हुसैन ने भूख-प्यास, जुल्मों सितम और अपनों की बलिदानी को सहकर भी हक की राह नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने पूरे खानदान और साथियों की कुर्बानी पेश कर दुनिया को यह पैगाम दिया कि सच कभी भी जुल्म के आगे घुटने नहीं टेकता है। हजरत सलमान रजा ने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला के माध्यम से पूरी इंसानियत को मोहब्बत, सब्र और कुर्बानी का पैगाम दिया है। उन्होंने इस्लाम को बचाने के लिए बलिदानी दी।
इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस्लाम के बताए रास्ते पर चले, नमाज का पाबंद बने, ईमानदारी को अपने किरदार का हिस्सा बनाए और सभी प्रकार की बुराइयों से बचकर हमेशा सच और हक की राह पर अडिग रहे। मोहर्रम के मौके पर इमाम हुसैन की याद में शहर में जगह-जगह लंगर और शरबत का वितरण किया गया। चमेली चौक में मुस्लिम समाज के युवाओं ने दोपहर में राहगीरों को शरबत पिलाया और शाम को लंगर वितरण किया। इस नेक काम में सभी धर्म-समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
लोगों ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए मुल्क में अमन-शांति, भाईचारा और तरक्की के लिए सामूहिक दुआ की। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के धमतरी जिला कोषाध्यक्ष मोहम्मद अहमद सोहराब गोरी एवं हाजी अब्दुल रशीद खत्री ने बताया कि कर्बला का पैगाम नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत और इंसानियत है। इमाम हुसैन ने सिखाया कि प्यासे बलिदान हो जाना मंजूर है, लेकिन किसी का हक मारना हराम है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की याद सिर्फ गम मनाने का नाम नहीं है, बल्कि गरीब को खाना खिलाना, प्यासे को पानी पिलाना और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना ही असली हुसैनियत है। कार्यक्रम के अंत में मुल्क की तरक्की, आपसी मोहब्बत और अमन-चैन के लिए विशेष दुआ की गई। 10 दिनों तक चली तकरीर में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा