दिमागी नक्सली होने पर गर्व करने वाले, जेब में झीरम का सबूत लेकर सत्ता की मलाई खाते रहे - संजय पाण्डेय
जगदलपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। महापौर संजय पाण्डेय ने झीरम घाटी मामले को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर कहा कि कांग्रेस झीरम की पीड़ा को न्याय का विषय नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सुविधा का हथियार बनाती रही है। वर्षों तक कांग्रेस के नेता सार्वजनिक मंचों से दावा करते रहे कि झीरम कांड के सबूत उनकी जेब में हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में पूरे पांच साल सरकार चलाने के बावजूद उन्होंने न कथित सबूत जनता के सामने रखे, न जांच को किसी निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया और न ही अपने आरोप प्रमाणित कर पाए।
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के नेताओं के पास वास्तव में कोई ठोस प्रमाण था, तो सत्ता में रहते हुए उनके हाथ किसने बांध रखे थे? उन्हें जांच आगे बढ़ाने, दस्तावेज प्रस्तुत करने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने से किसने रोका था? कांग्रेस को अब यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पांच वर्षों तक उसके कथित सबूत जेब से बाहर क्यों नहीं निकले। सत्ता चली गई तो अचानक झीरम की याद और प्रेस कॉन्फ्रेंस की राजनीति शुरू हो गई। इससे साफ है कि कांग्रेस की प्राथमिकता न्याय नहीं, केवल राजनीतिक लाभ और भ्रम फैलाना है।
संजय पाण्डेय ने कहा कि जिन लोगों को स्वयं को “दिमागी नक्सली” कहलाने पर गर्व होता है और जिनकी राजनीति प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से नक्सली विचारधारा को संरक्षण देने वाले बयानों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, उनसे राष्ट्रहित और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है? जब सुरक्षाबल नक्सलवाद की कमर तोड़ रहे हैं, बस्तर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएं पहुंच रही हैं, तब कांग्रेस का एक वर्ग नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई पर सवाल उठाकर उनका मनोबल बढ़ाने का काम करता दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि झीरम घाटी की घटना छत्तीसगढ़ के इतिहास का अत्यंत दुखद अध्याय है। उस त्रासदी में जान गंवाने वाले नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के प्रति पूरे प्रदेश की संवेदनाएं हैं। ऐसी घटना पर प्रमाणों के साथ गंभीरता से बात होनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस हर बार नए आरोप लगाकर इस पीड़ा का राजनीतिक दोहन करती है। कांग्रेस के नेताओं को कैमरे के सामने भाषण देने के बजाय अपने कथित प्रमाण जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे