सुहागिन महिलाएं करेंगी वट वृक्ष पूजन, पति की दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना
अखंड सौभाग्य का पर्व वट सावित्री व्रत आज
धमतरी, 15 मई (हि.स.)। अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु का प्रतीक वट सावित्री व्रत इस वर्ष 16 मई शनिवार को श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि पर पड़ने वाला यह पर्व सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करेंगी तथा परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी।
विप्र विद्वत परिषद धमतरी के अध्यक्ष पंडित बालेन्द पाण्डेय ने बताया कि वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और नारी शक्ति की आस्था का प्रतीक है। यह पर्व पौराणिक कथा सावित्री और सत्यवान से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप, अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। परिषद के मीडिया प्रभारी पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि वट वृक्ष को दीर्घायु, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं विधिवत पूजन कर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और परिवार की सुख-शांति, संतान की उन्नति तथा अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इस वर्ष वट सावित्री व्रत के दिन शनैश्चर जयंती का विशेष संयोग भी बन रहा है, जिससे पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। परिषद ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा है कि व्रत निर्धारित तिथि 16 मई शनिवार को ही करें तथा किसी भी प्रकार के भ्रम से बचें। महिलाओं से श्रद्धा और आस्था के साथ सनातन परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करने का आग्रह किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा