सुगड़ा बदलकर मराठा समाज की महिलाओं ने मनाया संक्रांति पर्व, दिखा उत्साह
धमतरी, 15 जनवरी (हि.स.)।मकर संक्रांति पर्व मराठा समाज में परंपरागत उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज की महिलाओं ने परंपरानुसार सुगड़ा (सुघड़ा) बदलकर सुहाग की सलामती और परिवार की खुशहाली की मंगल कामना की। पूरे आयोजन में पारंपरिक रीति–रिवाजों के साथ आपसी सौहार्द और उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
मराठा समाज की महिलाओं ने बताया कि संक्रांति पर्व पर मिट्टी के छोटे पात्र, जिन्हें सुगड़ा कहा जाता है, तैयार किए जाते हैं। इन सुगड़ों में मटर, बेर, सेमी, गाजर फल्ली सहित अन्य मौसमी सामग्री रखकर एक-दूसरे के साथ आदान-प्रदान किया जाता है। यह रस्म आपसी प्रेम, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक मानी जाती है। पर्व के दौरान महिलाओं ने हल्दी-कुमकुम लगाकर बड़ों से आशीर्वाद लिया और सुहाग की दीर्घायु की कामना की। इसके बाद तिल के लड्डू व तिल से बने अन्य पकवानों से एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया गया।
मान्यता है कि तिल के लड्डू की तरह जीवन में भी मिठास और मधुरता बनी रहे। संक्रांति पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। समूह में एकत्र होकर पारंपरिक ढंग से पर्व मनाते हुए उन्होंने खुशियां साझा कीं। शहर में इस दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का माहौल रहा। कई श्रद्धालुओं ने महानदी में डुबकी लगाकर सूर्यदेव की पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर अल्का रणसिंह, साधना रणसिंह, वर्षा जाचक, सोनिया रणसिंह, भूमिका डूकरे, संगम रणसिंह, ज्योति रणसिंह, नेहा रणसिंह, अर्पणा रणसिंह, रश्मि रणसिंह, मिताली कदम सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं। उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश अर्थात उत्तरायण का प्रतीक पर्व है, जिसे नई ऊर्जा, फसल उत्सव और खुशहाली की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा