छग विधानसभा में गूंजा लुण्ड्रा की जर्जर सड़कों का मुद्दा, उपमुख्यमंत्री शर्मा ने बताया-पीएमजीएसवाई के तहत 171 सड़कें शामिल
अम्बिकापुर, 15 जुलाई (हि.स.)। सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र की बदहाल और जर्जर सड़कों की गूंज अब छत्तीसगढ़ विधानसभा में सुनाई दी है।
प्रश्नकाल के दौरान क्षेत्रीय विधायक प्रबोध मिंज ने इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को घेरा और क्षेत्र की सड़कों के निर्माण, मरम्मत, रखरखाव तथा बजट प्रावधानों को लेकर कई गंभीर सवाल दागे। विधायक मिंज ने सरकार से स्पष्ट रूप से जानना चाहा कि वर्तमान में सड़कों के संधारण और मरम्मत के क्या नियम हैं, विशेषकर 10 वर्ष से अधिक पुरानी सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए विभाग क्या प्रक्रिया अपना रहा है और अब तक इन कार्यों पर कुल कितनी राशि खर्च की जा चुकी है।
विधायक के इन सवालों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सदन को लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत कुल 171 सड़कें शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों को साझा करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि इनमें से 87 सड़कों का नवीनीकरण किया जा चुका है, 28 नई सड़कों की स्वीकृति मिली है, जबकि 24 सड़कें फिलहाल निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, एक सड़क को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को हस्तांतरित किया गया है और शेष 31 सड़कों की मरम्मत की स्थिति की रिपोर्ट भी सदन पटल पर रखी गई।
इस दौरान विधायक प्रबोध मिंज ने केवल आंकड़ों पर ही संतोष नहीं जताया, बल्कि उन्होंने सड़कों की री-टेंडरिंग प्रक्रिया और लंबे समय से लटके कार्यों की कछुआ चाल पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की वित्तीय भागीदारी का हवाला देते हुए पूछा कि राज्य सरकार द्वारा अपनी हिस्सेदारी जारी किए जाने के बाद भी आखिर सड़कों की मरम्मत के लिए फंड की कमी क्यों हो रही है। विधानसभा में विधायक द्वारा उठाए गए इस पुरजोर मुद्दे के बाद अब लुण्ड्रा क्षेत्र की जनता में वर्षों से जर्जर सड़कों के सुधरने की उम्मीद एक बार फिर जग गई है। स्थानीय नागरिकों को भरोसा है कि इस चर्चा के बाद सरकार जल्द ही लंबित सड़क परियोजनाओं के लिए आवश्यक बजट स्वीकृत करेगी और सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह