बहुड़ा गोंच रथयात्रा-कपाट फेड़ा पूजा विधान के साथ श्रीजगन्नाथ स्वामी पहुचे श्रीमंदिर
जगदलपुर, 24 जुलाई (हि.स.)। बस्तर गोंचा महापर्व में आज शुक्रवार काे बहुड़ा गोंचा रथयात्रा पूजा विधान के तहत भगवान श्रीजगन्नाथ, सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के विग्रहों को रथारूढ़ कर परंपरानुसार जिस मार्ग से श्रीगोंचा रथयात्रा पूजा विधान के दौरान गुंडिचा मंदिर-जनकपुरी-सीरासार भवन पहुचे थे, उसी मार्ग से वापस श्रीजगन्नाथ मंदिर पहुचें।
श्रीमंदिर पहुचने पर परंपरानुसार पूजा अनुष्ठान के बाद कपाट फेड़ा पूजा विधान के तहत महालक्ष्मी-नारायण संवाद हुआ। जिसमें हेरापंचमी पूजा विधान में रूठी हुई महालक्ष्मी के द्वारा भगवान श्रीजगन्नाथ के वापस श्रीमंदिर पहुचने पर गर्भगृह का दरवाजा बंद कर अपनी नाराजगी प्रगट करती है।
भगवान श्रीजगन्नाथ अपनी भार्या महालक्ष्मी को मनाने के प्रसंग, जिसमे महालक्ष्मी-नारायण का संवाद हुआ जिसका निर्वहन 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने किया। इसे जिसे कपाट फेडा पूजा विधान कहते है। कपाट फेडा पूजा विधान के सम्पन्नता के साथ ही रूठी हुई महालक्ष्मी श्रीमंदिर का दरवाजा खोल देती है। भगवान जगन्नाथ 25 दिनों तक श्रीमंदिर के गर्भगृह से बाहर रहने के बाद आज पुन: श्रीमंदिर के गर्भगृह में समस्त भक्तो-श्रधालुओं के दर्शनार्थ स्थापित हुए। भगवान श्रीजगन्नाथ श्रीमंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने के साथ ही बस्तर गोंचा पर्व की सम्पन्नता लगभग पूरी हो जाती है।
बहुड़ा गोंचा रथयात्रा पूजा विधान एवं कपाट फेडा पूजा विधान के शाब्दिक अर्थो को जानने-समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी, भगवान श्रीकृष्ण के अवतार माने जाते है। भगवान श्रीकृष्ण मनुष्य रूप में अवतरित हुये थे। तदानुसार भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी की पूजा अनुष्ठान-सेवा भी मनुष्य रूप में ही की जाती है। बस्तर गोंचा पर्व के समस्त पूजा विधान इसी परंपरा पर आधारित है। बहुड़ा गोंचा रथयात्रा एवं कपाट फेडा दोनों ही उडिया भाषा से मूलरूप में स्थापित है।
बहुड़ा गोंचा रथयात्रा पूजा विधान का साब्दिक अर्थ, भगवान जगन्नाथ के श्रीगोंचा पूजा विधान के तहत जनकपुरी पहुचने के साथ ही अन्य पूजा अनुष्ठानों की सम्पन्नता के बाद वापस श्रीमंदिर लौटने के पूजा विधान कोबहुड़ा गोंचा रथयात्रा पूजा विधान कहते है। बहुड़ा अर्थात वापस जाना कहलाता है।यह भी कहा जा सकता है कि भगवान श्रीजगन्नाथ अपने बैकुंठ धाम में वापस स्थापित हो जाते है।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे