रंगमंच की सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर होगा चक्रधर समारोह के अंतिम दिवस का मंच

 


रायगढ़, 23 सितंबर (हि.स.)। प्रदेश कीे प्रसिद्ध चक्रधर समारोह के समापन अवसर पर आज बुधवार की शाम व अंतिम दिवस बस्तर के नारायणपुर जिले के

कलाकार अपनी नाट्य प्रस्‍तुत‍ि देंगे।

यह नाटक नारायणपुर में जिला प्रशासन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के सहयोग से बीते दिनों संपन्न हुई नाट्य शिविर में तैयार किया गया था। इस नाट्य शिविर में पुनर्वास केंद्र के पूर्व नक्सलियों और उनके परिवारजनों के अलावा नारायणपुर की जेन ज़ी ने हिस्सा लिया था। शिविर का निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक हीरा मानिकपुरी ने किया और “चंदा-चकोर” नाटक तैयार करवाया। इस नाटक में तक़रीबन 50 लोगों ने काम किया। नाटक का संगीत राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ही स्नातक गरिमा दिवाकर ने तैयार किया। आर्ट एण्ड क्राफ़्ट का जिम्मा अरुण भांगे (बिलासपुर) ने संभाला है। नाटक “चंदा-चकोर” के कुछ सफल शोज़ नारायणपुर में हो चुके हैं।

चक्रधर समारोह आयोजन समिति के अध्यक्ष कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस साल सभी कलाओं की समावेशी ख़ास विधा रंगमंच को अंतिम दौर में शामिल किया, जिसके परिणामस्वरूप आज 23 दिसंबर बुधवार की शाम समारोह के समापन अवसर पर नाटक “चंदा-चकोर” की प्रस्तुति होनी है। इस नाटक की अवधि तक़रीबन एक घंटे है, मगर आयोजन समिति द्वारा प्रस्तुति के लिये महज़ 20 मिनट दिये गये हैं। लिहाज़ा नाटक के मूल कथ्य के साथ ज़रूरी संदेश को दर्शकों तक पहुंचाने के लिये नाटक के कुछ हिस्से काे निर्देशक हीरा मानिकपुरी ने एडिट कर दिये हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान