लखपति दीदी बनीं सुरेखा जायसवाल, संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरक कहानी
कोरबा, 08 अप्रैल (हि. स.)। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी यदि हौसले बुलंद हों, तो सफलता की राह खुद बन जाती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है कटघोरा विकासखंड के ग्राम धंवईपुर नवापारा की निवासी सुरेखा जायसवाल की, जिन्होंने संघर्ष को अपनी ताकत बनाकर आज “लखपति दीदी” के रूप में नई पहचान हासिल की है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही बिहान योजना का लाभ उठाकर सुरेखा ने अपने जीवन की दिशा बदल दी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
सुरेखा जायसवाल, जिन्होंने दसवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की, पहले एक सामान्य गृहिणी थीं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उनके पति पर थी, लेकिन उन्होंने भी परिवार की आय बढ़ाने का संकल्प लिया। वर्ष 2019 में आस्था महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आत्मविश्वास के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी मिला।
बिहान योजना के तहत उन्हें 10 हजार रुपये की आरएफ राशि, 30 हजार रुपये की सीआईएफ राशि और स्वयं सिद्धा पहल के अंतर्गत 2 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके साथ ही विभिन्न प्रशिक्षणों के माध्यम से उन्होंने व्यवसाय की बारीकियां सीखीं। आगे चलकर एफएलसीआरपी के जरिए बैंक से 1 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने श्रृंगार सामग्री की दुकान, किराना दुकान और फोटोकॉपी सेंटर की शुरुआत की।
उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि आज उनकी वार्षिक आय लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है। अब वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रही हैं, बल्कि घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
सुरेखा जायसवाल की यह सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ शासन और बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं के सहयोग से आज वे सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं और अपने परिवार को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।
यह कहानी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, अवसर और दृढ़ संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में नई मिसाल कायम कर सकती हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी
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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी