कोरबा में जल प्रबंधन मॉडल की केंद्र सरकार ने की सराहना

 


कोरबा ,20 जुलाई (हिस)।वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर बढ़ाने की दिशा में नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा किए जा रहे कार्यों को केंद्र सरकार से बड़ी सराहना मिली है। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डी. तारा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आज अमृत मिशन 2.0 के तहत संचालित 'कैच द रेन' परियोजना और जल प्रबंधन कार्यों की समीक्षा करते हुए महापौर संजूदेवी राजपूत तथा आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने निगम द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उनके सकारात्मक परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणादायक बताया।

अमृत मिशन 2.0 के अंतर्गत संचालित सेलो एक्वीफर मैनेजमेंट योजना के तहत देशभर के निर्धारित मानकों वाले 75 शहरों में से पहले चरण में केवल 10 शहरों का चयन किया गया था, जिनमें छत्तीसगढ़ का कोरबा भी शामिल है। इसी परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार से महापौर संजूदेवी राजपूत, आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, सभापति नूतन सिंह ठाकुर, मेयर-इन-काउंसिल के सदस्य, पार्षद और एल्डरमैन शामिल हुए।

बैठक में निगम प्रशासन ने बताया कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 10 रिचार्ज वेल का निर्माण कराया गया है। इनका निर्माण नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (इसरो) के तकनीकी विशेषज्ञों के परामर्श से इंजेक्ट वेल पद्धति के अनुसार किया गया है। इसका उद्देश्य भारी वर्षा के दौरान सड़कों और नालियों में बहने वाले वर्षा जल को रिचार्ज वेल के माध्यम से जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को बढ़ाना है। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था से बड़ी मात्रा में वर्षा जल नालों और नदियों में बहकर नष्ट होने से बच रहा है और भूजल पुनर्भरण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

निगम प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि कोरबा शहर में वर्षा जल संचयन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया है। नगर निगम एवं अन्य शासकीय भवनों में 757 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट तथा निजी भवनों में 971 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित किए जा चुके हैं। इस प्रकार पूरे निगम क्षेत्र में अब तक 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही भवन निर्माण अनुमति जारी करते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है।

महापौर और आयुक्त ने बताया कि निगम क्षेत्र में बनने वाले सभी नए सामुदायिक भवन, विद्यालय, आंगनबाड़ी, मंगल भवन तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा शहर में अनुपयोगी, क्षतिग्रस्त और ध्वस्त हो चुके 95 बोरवेलों की पहचान कर उन्हें पुनः ड्रिलिंग के माध्यम से रिचार्ज पिट के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना भी तैयार की गई है।

बैठक में शहर में दूषित जल के पुनः उपयोग की दिशा में चल रहे कार्यों की भी जानकारी दी गई। निगम ने बताया कि शहर के 11 बड़े नालों से निकलने वाले गंदे पानी का शुद्धिकरण कर दोबारा उपयोग करने के लिए 33 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जा रहा है। इसके साथ ही एनटीपीसी को शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए 20 एमएलडी क्षमता का टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) भी तैयार किया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य प्रगति पर है।

समीक्षा के दौरान अतिरिक्त सचिव डी. तारा ने कोरबा नगर निगम द्वारा जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल पुनर्चक्रण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताते हुए कहा कि इन योजनाओं से भविष्य में जल संकट से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने महापौर संजूदेवी राजपूत और आयुक्त आशुतोष पाण्डेय को बधाई देते हुए इन कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने की अपेक्षा जताई।

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी