मां दंतेश्वरी मंदिर जगदलपुर में रियासत कालीन परंपरानुसार कलश स्थापना की गई
जगदलपुर, 11 अक्टूबर (हि.स.)। नवरात्रि के पहले दिन रविवार काे मां दंतेश्वरी मंदिर में बस्तर दशहरे की एक महत्वपूर्ण रस्म कलश स्थापना विधि विधान के साथ निभाई गई। जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में राज परिवार के सदस्य पहुंचकर उन्होंने कलश की स्थापना की। इस दाैरान रियासत कालीन हथियारों को रखकर अखंड ज्योत जलाई जाती है। जिसे हवन के बाद बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी में प्रवाह कर दिया जाता है। इस रस्म की अदायगी बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने की, उनके साथ बस्तर परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
बस्तर राज परिवार सदस्य कमलचंद भंजदेव का कहना है कि नवरात्रि के अवसर पर दंतेश्वरी मंदिर के भीतर कलश स्थापना की रस्म निभाई जाती है। जिसमें दो कलश की स्थापना करते हैं। एक ज्योति कलश और दूसरा शक्ति की कलश होती है। शक्ति की कलश में रियासतकाल के तलवारों को रखकर उसके सामने अखंड ज्योत जलाई जाती है। यह ज्योत लगातार आठ दिनों तक जलता है, जिसे यह बुझने नहीं दिया जाता है। अष्टमी में हवन के बाद इसे इंद्रावती नदी में प्रवाह कर दिया जाता है। कलश स्थापना के दौरान राज परिवार के सदस्य यह संकल्प लेते हैं कि बस्तर दशहरे में किसी प्रकार की कोई बाधा उत्पन्न ना हो, साथ ही सभी वर्ग के लोगों का देवी ख्याल रखें। पहला अखंड ज्योत दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी व राज परिवार के सदस्य ही जलाया करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे