जशपुर : जिला अस्पताल ने दो गंभीर मामलों में दिखाई तत्परता, बचाई बच्ची और महिला की जान

 


जशपुर, 01 सितंबर (हि.स.)। जिला चिकित्सालय जशपुर की विशेषज्ञ टीम ने तत्परता और त्वरित चिकित्सकीय निर्णय से दो जटिल व गंभीर मामलों में समय रहते उपचार कर मिसाल पेश की है। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समन्वित प्रयासों से जहां एक ओर सेप्टिक शॉक की चपेट में आई 10 वर्षीय बच्ची को सुरक्षित उबारा गया, वहीं दूसरी ओर एक महिला की एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सफल ऑपरेशन कर उसे नए जीवन का संबल दिया गया। स्थानीय स्तर पर इन आपातकालीन व उच्चस्तरीय सुविधाओं के सुलभ होने से मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल रहा है, जिससे उन्हें दूसरे राज्यों या महानगरों के बड़े चिकित्सा संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा।

गुमला (झारखंड) के पाकड़टोली निवासी 10 वर्षीय संध्या कुमारी को गंभीर अवस्था तेज बुखार, सुस्ती, अत्यधिक कमजोरी और बेहोशी की स्थिति में जिला अस्पताल लाया गया था। प्रारंभिक जांच में बच्ची का रक्तचाप व ब्लड शुगर बेहद कम था और उसके लिवर तथा किडनी के स्तर पर गंभीर असामान्यताएं पाई गईं।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज प्रधान (एमडी, पीडियाट्रिक्स) के नेतृत्व में जांच के बाद बच्ची की स्थिति को सेप्टिक शॉक के रूप में चिन्हित किया गया। बिना समय गंवाए उसे इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड्स, उच्च श्रेणी के एंटीबायोटिक्स और तीन दिनों तक वासोएक्टिव (लाइफ-सेविंग सपोर्ट) की निगरानी में रखा गया। नर्सिंग टीम में शामिल अमृता सिंह, संध्या सविता एक्का, अनुपा मिंज, वसुंधरा साय, प्रमिला भगत, रेशमा किस्पोट्टा, अमीना मिंज और अंकिता मिंज की 24 घंटे सतर्क देखभाल से बच्ची की हालत अब पूरी तरह खतरे से बाहर और स्थिर है।

वहीं दूसरे मामले में, कुनकुरी विकासखंड के ग्राम घरमुंडा निवासी चंद्रिका बाई के गर्भ की जांच में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की पुष्टि हुई, जिसमें भ्रूण गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में विकसित हो रहा था। फैलोपियन ट्यूब फटने से होने वाले अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव के खतरे को भांपते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता साय ने आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया। चिकित्सकीय टीम ने तत्काल सुरक्षित ऑपरेशन कर जोखिम को टाल दिया; अब महिला की स्थिति सामान्य है और वह सतत निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं को चौबीसों घंटे और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। शासन द्वारा आवश्यक संसाधनों और डीएफआर की उपलब्धता सुनिश्चित होने से अब आपातकालीन स्थितियों में रात्रि के समय भी सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी। इससे प्रसव संबंधी आकस्मिक जटिलताओं और गंभीर सर्जिकल मामलों में स्थानीय स्तर पर ही समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह