जशपुर के किसानों ने गढ़ी सफलता की नई इबारत, धान की जगह सेब की खेती से महकी आदिवासियों की तकदीर

 








जशपुर, 23 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब खेती और बागवानी के क्षेत्र में अपनी एक नई और विशिष्ट पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिले के किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर फलों की खेती के प्रति लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला प्रशासन और रूरल डेवलपमेंट एंड डेवलपमेंट सोसायटी (नाबार्ड) के संयुक्त प्रयासों से मनोरा और बगीचा विकासखंड में सेब की खेती ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस अनूठी पहल से न केवल क्षेत्र के किसानों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आ रहा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर और मजबूत बन रहे हैं।

जशपुर जिले के मनोरा और बगीचा विकासखंड का तापमान और यहां की जलवायु सेब की बागवानी के लिए बेहद अनुकूल पाई गई है। यही वजह है कि वर्ष 2023 में यहां के आदिवासी किसानों ने जिस सेब की खेती की शुरुआत की थी, वह आज पूरी तरह रंग ला चुकी है। वर्तमान में क्षेत्र के शैला, छतौरी और करदना के आस-पास के गांवों समेत बगीचा विकासखंड के ग्राम छिछली में किसान बड़े पैमाने पर सेब का उत्पादन कर रहे हैं। इस वर्ष लगभग 410 एकड़ भूमि पर लगाए गए सेब के पौधों में बेहतर आकार और उत्कृष्ट गुणवत्ता के फल आए हैं, जिन्हें देखकर किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। स्थानीय किसानों का उत्साहपूर्वक कहना है कि जशपुर की माटी में उपजे ये सेब स्वाद के मामले में कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेबों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए रूरल डेवलपमेंट एंड डेवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि जशपुर जिले के किसान अब धान के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलकर अन्य नकदी फसलों को अपना रहे हैं। वर्तमान में जिले के कुल 410 किसान सीधे तौर पर सेब की खेती से जुड़े हुए हैं। योजना के तहत प्रत्येक किसान ने अपने-अपने एक-एकड़ के खेत में सेब के पौधे लगाए हैं, जिससे कुल 410 एकड़ में सेब का यह विशाल बगीचा लहलहा रहा है। विविधीकृत खेती का यह मॉडल जशपुर के ग्रामीण अंचलों में समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह