खाद्य पदार्थों के निर्माण में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं : डाॅॅ. नवनीत राणा
कार्यशाला में युवाओं को बताई गई रोचक बातें
धमतरी, 20 जून (हि.स.)। कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने तथा युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरुद में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना अंतर्गत शनिवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष अधिष्ठाता डाॅ. नवनीत राणा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन के माध्यम से आय वृद्धि की व्यापक संभावनाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कृषि आधारित स्टार्टअप एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने तथा स्थानीय कृषि उत्पादों को मूल्य संवर्धन के माध्यम से बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य वक्ता प्रचेता किरण छिड़ेहा ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण, विस्तार एवं स्थापना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक अनुदान, अधिकतम 10 लाख रुपये तक प्रदान किया जाता है। साथ ही बैंक ऋण, तकनीकी प्रशिक्षण, उत्पाद गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
विद्यार्थियों को बताया कि कृषि उपज आधारित उत्पादों जैसे अचार, पापड़, मुरब्बा, जैम, जेली, मसाले, दाल प्रसंस्करण, मिलेट आधारित उत्पाद एवं अन्य मूल्य संवर्धित खाद्य पदार्थों के निर्माण में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। योजना का लाभ लेकर युवा उद्यमी स्वयं का उद्योग स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकते हैं। जिला रिसोर्स पर्सन डाॅ. संदीप मेश्राम ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा मानकों, आधुनिक तकनीकों तथा आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ प्रभावी विपणन रणनीति अपनाकर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के तकनीकी प्रभारी डाॅ. पीयूष प्रधान ने कृषि क्षेत्र में नवाचार, एग्री-स्टार्टअप एवं उद्यमिता की बढ़ती संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि कृषि स्नातक युवाओं के लिए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र रोजगार सृजन एवं आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। विद्यार्थियों को कृषि आधारित व्यवसायों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग एवं मूल्य संवर्धन की दिशा में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा